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फैक्टरी से निकलता जहरीला धुआं (सांकेतिक तस्वीर)

अध्ययन: वायु प्रदूषकों के बढ़ते स्तर का असर दिल्ली और कानपुर में ज्यादा, तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर

by Sneha Shukla

एजेंसी, लंदन / वाशिंगटन

द्वारा प्रकाशित: देव कश्यप
अपडेटेड शुक्र, 30 अप्रैल 2021 02:22 AM IST

फैक्टरी से निकलता जहरीला मुस्कान (सांकेतिक चित्र)
– फोटो: अमर उजाला

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ब्रिटेन में बर्मिंघम विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक स्टॉक के मुताबिक, भारत के नई दिल्ली सहित कई शहरों में वायु प्रदूषकों का स्तर अधिक है। अध्ययन में नई दिल्ली, कानपुर और लंदन में वायु प्रदूषण फॉर्मल्डीहाइड में वृद्धि देखी गई है। उपग्रहों पर लगे उपकरणों के आंकड़ों के अध्ययन में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने की जरूरत और स्वच्छ पर्यावरण के लिए उठाए जा रहे कदमों पर जोर दिया गया है।

बर्मिंघम विश्वविद्यालय के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 2005 से 2018 तक वायु प्रदूषकों की प्रवृत्ति का अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष आधारित उपकरणों से आंकड़ों का इस्तेमाल किया। इस अध्ययन में बेल्जियम, भारत, जमैका और ब्रिटेन के आंतरिक समूह भी शामिल हैं। पत्रिका ‘एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री और फिजिक्स’ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड दोनों ही कानपुर और दिल्ली में बढ़ रहे हैं।

दिल्ली तेजी से उभरता महानगर है जबकि कानपुर को डब्ल्यूएचओ ने 2018 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया था। शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत में पीएम 2.5 और नाइट्रोजन ऑक्साइड का हिलने वाले वाहनों की तादाद, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण नीतियों के सीमित प्रभाव को दिखाता है।

दुनिया में बड़े तेजी से पिघलल रहा ग्लेशियर, हिमालय भी अनंत
धरती के बढ़ते तापमान के चलते दुनिया के सभी ग्लेशियर तेजी से पिघललकर अपना आकार खो रहे हैं। इसके सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में हिमालय, अलास्का, आइसलैंड, एल्प्स और पालिर का बर्फीला क्षेत्र शामिल है। इस बारे में एक रिपोर्ट विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में अमेरिकी विशेषज्ञों के अध्ययन के हवाले से प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग 2,20,000 ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इसके कारण समुद्रों का जल फैलाव हो रहा है और लाखों हेक्टेयर भूमि का पानी डूब गया है। इससे समुद्रों के किनारे बसे हुए शहरों, आबादी और भूलों को खासतौर से खतरा पैदा हो गया है।

विस्तार

ब्रिटेन में बर्मिंघम विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक स्टॉक के मुताबिक, भारत के नई दिल्ली सहित कई शहरों में वायु प्रदूषकों का स्तर अधिक है। अध्ययन में नई दिल्ली, कानपुर और लंदन में वायु प्रदूषण फॉर्मल्डीहाइड में वृद्धि देखी गई है। उपग्रहों पर लगे उपकरणों के आंकड़ों के अध्ययन में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने की जरूरत और स्वच्छ पर्यावरण के लिए उठाए जा रहे कदमों पर जोर दिया गया है।

बर्मिंघम विश्वविद्यालय के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 2005 से 2018 तक वायु प्रदूषकों की प्रवृत्ति का अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष आधारित उपकरणों से आंकड़ों का इस्तेमाल किया। इस अध्ययन में बेल्जियम, भारत, जमैका और ब्रिटेन के आंतरिक समूह भी शामिल हैं। पत्रिका ‘एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड फिजिक्स’ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड दोनों ही कानपुर और दिल्ली में बढ़ रहे हैं।

दिल्ली तेजी से उभरता महानगर है जबकि कानपुर को डब्ल्यूएचओ ने 2018 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया था। शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत में पीएम 2.5 और नाइट्रोजन ऑक्साइड का हिलने वाले वाहनों की तादाद, जैविककरण की प्रगति और वायु प्रदूषण नीतियों के सीमित प्रभाव को दिखाता है।

दुनिया में बड़े तेजी से पिघलल रहा ग्लेशियर, हिमालय भी अनंत

धरती के बढ़ते तापमान के चलते दुनिया के सभी ग्लेशियर तेजी से पिघललकर अपना आकार खो रहे हैं। इसके सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में हिमालय, अलास्का, आइसलैंड, एल्प्स और पामीर का बर्फीला क्षेत्र शामिल है। इस बारे में एक रिपोर्ट विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में अमेरिकी विशेषज्ञों के अध्ययन के हवाले से प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग 2,20,000 ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इसके कारण समुद्रों का जल फैलाव हो रहा है और लाखों हेक्टेयर भूमि का पानी डूब गया है। इससे समुद्रों के किनारे बसे हुए शहरों, आबादी और भूलों को खासतौर से खतरा पैदा हो गया है।

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