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आंदोलन के बीच किसानों को बड़ा झटका, खाद की कीमतों में 58% तक इजाफा, अनाज से सब्जियां तक होंगी महंगी

पश्चिम बंगाल में चुनाव और केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के बीच अन्नर्स को एक और बड़ा झटका लगा है। देश के सबसे बड़े खाद विक्रेता भारतीय फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (इफको) ने उर्वरकों की कीमत में बड़ा इजाफा कर दिया है। डाई-अमोनियम फासफेट (डीएपी) का 50 किलो वाले बैग की कीमत में 58 प्रति की वृद्धि की गई है। पहले यह 1200 रुपए में मिलता था तो किसानों को अब 1900 रुपए चुकाने होंगे। बता दें, उस देश में यूरिया के बाद किसान सबसे ज्यादा डीएपी का ही इस्तेमाल करते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इफको नेत्रियों के विभिन्न मिश्रण एनपीकेएस (नाइट्रोजन, फासफोरस, पोटाश और सल्फर) की एमआरपी में भी इजाफा कर दिया है। 10:26:26 की कीमत 1,175 रुपये से बढ़ाकर 1,775 रुपये कर दी गई है, तो 12:32:16 के लिए अब 1,185 की बजाय 1,800 रुपये देने होंगे। वहीं, 20: 20: 0: 13 के मिश्रण वाले 50 किलो के बैग के लिए अब 925 की जगह 1350 रुपए खर्च करने होंगे। नई दुकानें 1 अप्रैल से लागू हो गई हैं।

इफको के एक प्रवक्ता ने कहा कि गैर-यूरियात्रियों की कारों से पहले ही नियंत्रण मुक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोऑपरेटिव के फैसले का किसी राजनीतिक दल या सरकार से लेनादेना नहीं है। उन्होंने बताया कि कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से आंतरिक बाजार की वजह से है। पिछले 5-6 महीनों में आंतरिक बाजार में इनकी बिक्री तेजी से बढ़ी है।

अक्टूबर में जहां डीएपी के सौदे के लिए प्रति टन 29,845 रुपए खर्च करने वाली थीं, अब उसकी कीमत 40,290 प्रति टन हो गई है। इसी तरह आंतरिक बाजार में अमोनिया की कीमत प्रति टन 20891 रुपए से बढ़कर 37,306 रुपए हो गई है। सल्फर की कीमत 6,342 रुपये प्रति टन से बढ़कर 16,414 रुपये प्रति टन हो गई है। इस दौरान यूरिया और पोटाश की मशीनें भी काफी बढ़ गई हैं। प्रति टन यूरिया की कीमत 20,518 रुपए से बढ़कर 28352 रुपए हो गई है।

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में तेजी के बीच खाद की कीमतों में इजाफे का राजनीतिक और आर्थिक असर हो सकता है। खाद की कीमतों में वृद्धि ऐसे समय पर की गई है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव चल रहे हैं और केंद्र की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी यहां किसानों को अपने पाले में करने में जुटी है। दूसरी ओर दिल्ली की सीमाओं पर किसान लंबे समय से विरोध प्रदर्शन में जुटे हैं। किसान केंद्र सरकार के 3 कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।

बढ़ेगी महंगाई?
कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि खाद की कीमतों में वृद्धि का असर सिर्फ किसानों पर नहीं होगा, बल्कि खेती में लागत बढ़ने से अनाज और सब्जियों की खेती भी प्रभावित होगी। खाद की बाइकें बढ़ने से मोदी सरकार पर अनाजों की एमएलपी बढ़ाने का दबाव भी बढ़ गया है।




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