न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
द्वारा प्रकाशित: दुष्यंत शर्मा
अपडेटेड शुक्र, 23 अप्रैल 2021 12:27 AM IST
ख़बर सुनकर
रात 12 बजकर 25 मिनट पर अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर स्ट्रेचर पर लेटी एक महिला की सांस उखड़ने लगी। इस बीच तीमारदार ने जब चिल्लाना शुरू किया तो आनन-फानन में पीसीबीई किट पहने डॉ वहां पहुंचे और महिला को सीपीआर देने लगे, लेकिन करीब पांच मिनट की काफी कोशिशों के बाद भी मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी।
इससे पहले चार अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद जीटीबी पहुंचे एक बुजुर्ग मरीज ने स्ट्रेचर पर ही दम तोड़ दिया। जानकारी मिली है कि मरीज को सांस लेने में तकलीफ थी। समय पर अस्पताल में बिस्तर और ऑक्सीजन न मिलने की वजह से उनकी मौत हो गई। यह पूरी घटना अमर उजाला के फोन में भी कैद हुई। पूछताछ में पता चला कि महिला शाहदरा के ज्योति नगर निवासी और बुजुर्ग मरीज दिलशाद गार्डन के निवासी थे। हालांकि, दोनों के ही परिजन अधिक बातचीत करने की स्थिति में नहीं थे, जिसके कारण समाचार लिखे जाने तक उन्हें अधिक जानकारी नहीं मिल सकी।
इसी तरह रात 12 बजकर 28 मिनट पर एक महिला डॉ के आगे हाथ जोड़कर अपने पति को भर्ती करने के लिए रोती रही। महिला रोते-रोते बोल रही थी कि उनके पति को सांस नहीं आ रही है। उनका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म होने वाला है। डॉ साहब, ये ऑक्सीजन दे दो … ये भर्ती कर लो। 20 मिनट तक अपील करने के बाद जब डॉक्टरों ने काफी कोशिशों के बाद उन्हें निर्दिष्ट किया कि अस्पताल में एक भी बिस्तर खाली नहीं है न ही उनके पास अतिरिक्त ऑक्सीजन का प्वाइंट है, जिसके माध्यम से उनके पति को सफलतापूर्वक सक्षम किया जा सकता है। इसके बाद महिला अपने पति को एक कार में ले गई।
अस्पताल के आपातकालीन विभाग में तैनात डॉक्टरों ने अपनी पहचान नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास संसाधनों की कमी है। यह पूरी तरह से नहीं है कि कोई मरीज वापस न आए। जिन रोगियों को सांस लेने में दिक्कत होती है, उन्हें हम ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कर सकते हैं। क्योंकि हमारे पास अतिरिक्त प्वाइंट नहीं है।
।
