चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों में क्लिक की गई राशि के बारे में जानकारी देते हुए शुक्रवार को कहा कि चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों और कुछ सीटों पर उप चुनावों के दौरान 1000 करोड़ रुपये से अधिक की आय, शराब और दूसरी चीजें बरामद की गई, जिनके इस्तेमाल मतदाताओं को लालच देने के लिए होना था।
यह राशि 2016 में हुए चुनावों के दौरान पलायन की गई राशि की तुलना में चार गुना से अधिक है। आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, TN में सबसे अधिक 446.28 करोड़ रुपये बच गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 300.11 करोड़ रुपये बच गए।
बता दें कि तमिलनाडु में मतदान संपन्न हो चुका है, जबकि पश्चिम बंगाल में अभी चार चरणों का मतदान शेष है। आगे के चरणों के दांव के समापन होने के बाद आयोग की रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा। असम, केरल और पुडुचेरी में भी मतदान संपन्न हो चुका है।
आयोग ने कहा कि उसने चुनाव में खर्च की निगरानी के लिए कुल 326 पर्यवेक्षक तैनात किए थे और 259 विधानसभा क्षेत्रों को संवेदनशील क्षेत्रों की श्रेणी में रखा गया था।
कानून के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नकद और उपहार देने की मनाही है और ऐसे खर्च को रिश्वत की श्रेणी में गिना जाता है। ऐसी स्थिति में जन प्रतिनिधित्व कानून और भारतीय दंड संहिता की धारा 171 बी के तहत अपराध का मामला बनता है। आयोग ने कहा कि आगे के चरणों के चुनाव के दौरान भी धनबल के उपयोग की समस्या के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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