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नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के। सिवन ने शुक्रवार को कहा कि भारत अपने मानव अंतरिक्ष अभियान गगनयान के लिए हरित ईंधन का उपयोग किए जाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसरो भविष्य के अपने सभी अभियानों के लिए हरित ईंधन के उपयोग को लेकर कार्य कर रहा है।
वास्टोको द्वीप पर ग्राउंड स्टेशन होगा
भारत इकॉनोमिक कांक्लेव के एक सत्र के दौरान सिवन ने कहा कि भारत गगनयन मिशन के वास्ते कोको द्वीप पर ग्राउंड स्टेशन उपलब्ध कराने के लिए आस्ट्रेलिया के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसरो वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की महत्वकांक्षा नहीं रखता है।
अंतरिक्ष अभियान में हरित ईंधन का उपयोग होगा
सिवन ने कहा कि इसरो का प्राथमिक उद्देश्य देश की सेवा और अंतरिक्ष में अवसंरचना की आवश्यकताओं को पूरा करना है, जिससे देश में व्यापक स्तर पर सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके। हरित ईंधन के उपयोग पर अक्सर पूछे गए एक सवाल पर इसरो प्रमुख ने कहा, ‘अंतरिक्ष अभियानों के लिए हरित ईंधन का उपयोग किए जाने की आवश्यकता है। हम हरितुत के माध्यम से ही गगन्यान को उड़ाने जा रहे हैं। यह अत्यंत आवश्यक है। ‘
सोवियत संघ की मदद से भेजा गया पहला उपग्रह था
उन्होंने कहा कि इसरो ने पहले ही हरित ईंधन के उपयोग वाले इंजन का विकास करना शुरू कर दिया है। बता दें कि 15 अगस्त 1969 में भारतीय अन्तरिक्ष मिशन संगठन की स्थापना की गयी थी। विजेताओं के दौर में इसरो का नाम ‘अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति’ (INCOSPAR) रखा गया था। वहीं भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट को 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ की मदद से अंतरिक्ष में छोड़ा गया था।
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