पटना: देश भर में फिर एक बार कोरोना संक्रमण बड़ी तेजी से फैल रहा है। ऐसे में स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। इसी क्रम में बिहार सरकार ने संक्रमण को फैलाने से रोकने के लिए शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इसमें राज्य भर के मंदिरों में आम लोगों के प्रवेश को वर्जित करने का फैसला भी शामिल है। लेकिन नीतीश सरकार के इस फैसले से उनके सहयोगी दल के नेता खुश नहीं हैं।
मंदिर क्यों नहीं बन सकता?
मधुबनी जिले के बिस्फी विधानसभा सीट से विधायक और बीजेपी नेता हरिभूषण ठाकुर ने सीएम नीतीश के मंदिर बंद करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने भक्तों के धार्मिक स्थलों पर जाने पर रोक लगा दी है। लेकिन जब लोग ढाबे और पार्क में जा सकते हैं, तो मंदिरों में क्यों नहीं हो सकते?
मंदिरों से जुड़े कई लोगों का रोजगार है
उन्होंने कहा कि कोरोना गाइडलाइन को फॉलो करते हुए लोगों को मंदिरों में जाने की इजाजत देनी चाहिए। पिछले साल दोना के समय में मुस्लिमों को रमजान को लेकर छूट दी गयी थी, तो मंदिर जाने को लेकर छूट क्यूं नहीं मिल सकती है? मंदिरों से कई परिवार का रोजगार जुड़ा हुआ है, इसलिए सीएम नीतीश कुमार को इसपर विचार करने की जरूरत है।
गौरतलब है कि राज्य में कोरोन के बढ़ते मामले को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पीसी की थी। इस दौरान उन्होंने एलान किया था कि कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए एसबे के स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान को अगले 1 सप्ताह के दौरान बंद कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही कोरोना को लेकर आम लोगों के मौवमेंट पर भी पांबन्दी लगाई गई है। सरकारी आदेश के अनुसार राज्य में 30 अप्रैल तक अब दुकानें शाम के 7:00 बजे तक खुल जाएंगी। वहीं, होटल-रेस्तरां शाम के 7:00 बजे के बाद भी खुले रहेंगे। इसके अलावा सिनेमा हॉल में 50% लोगों को ही प्रवेश करने की अनुमति होगी। सभी धार्मिक स्थलों पर 30 अप्रैल को आम लोगों के प्रवेश को वर्जित किया गया है।
सरकारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट में 50% लोगों को केवल बैठाने की अनुमति होगी। वहाँ, शादी में 200 लोग और श्राद्ध में 50 लोगों की उपस्थित होने की अनुमति है।
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