पटना: बिहार में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बड़ी तेजी से पांव पसार रही है। रोजाना बढ़ रही जाटों के नंबर लोगों को डरा रही है। ऐसे में राज्य में लगातार सम्पूर्ण लॉकडाउन की मांग उठ रही है। विपक्ष के साथ ही सत्ताधारी दल के नेता भी लॉकडाउन के समर्थन में बोल रहे हैं। हालांकि, पीएम मोदी के अपील के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लॉकडाउन लगाने के पक्ष में नहीं हैं।
बिहार सरकार ये काम करे
राज्य में लॉकडाउन की मांग के बीच पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इसी तरह सभी नेताओं पर तंज कसा है, जो लॉकडाउन की तरफदारी कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, “मैं लॉकडाउन का समर्थन करूंगा। अगर तीन महीने तक सबका बिजली बिल, पानी बिल, स्कूल / कॉलेजों की फीसive कर दिया जाए। विजेताओं का किराया, बैंक लोन ईएमआईवाइ कर दिया जाए।
मैं लॉकडाउन का समर्थन करूँगा यदि तीन महीने तक,
सबका बिजली बिल, पानी बिल, स्कूल / कॉलेजों की फ़ीसिव कर दिया जाएगा,
किराएदारों का किराया, बैंक लोन EMIive कर दिया जाएगा …
कोई कोहरा नहीं होता।
ये बात एसी वाले लोग नहीं समझेंगे।– जीतन राम मांझी (@jitanrmanjhi) 27 अप्रैल, 2021
मांझी ने कहा, “किसी को शौक नहीं होता।
वहीं, पार्टी प्रवक्ता दानिश रिजवान ने पार्टी प्रमुख की बात को दोहराते हुए कहा कि जो लोग एसी कमरों में बैठकर तालाडाउन करने का सुझाव दे रहे हैं, वो पहले ये बताते हैं कि इस दौरान लोगों का पेट कैसा भरागा? उनकी जरूरतें पूरी तरह से कैसे होंगी?
इन प्रमुखों ने की लॉकडाउन की मांग
मालूम हो कि जब से बिहार में नाइट कर्फ्यू का एलान किया गया है, तब से एक नया विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष ही नहीं सत्ताधारी दल के नेता भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर अपने ही सरकार से फैसले को गलत बताया था। इसके अलावा मंत्री रामसूरत राय और सुप्रीमो मुकेश सहनी ने भी लॉकडाउन की मांग की थी।
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