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पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में नवाबों के गांव शेरपुर की होली का रिवाज कुछ अलग ही है। यहां होली के दिन होरियारों की टोलियां मुस्लिम भाइयो के घर जाकर उन्हें जमकर गालियां देते हैं। बारी में होरियारों की टोली को नजराना रखनेौर मुस्लिम भाइयो की ओर से उपहार प्रस्तुत किया जाता है। पूरनपुर तहसील के शेरपुर गांव में होली की ये अनोखी परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।
होली का अलग अंदाज
होली के रंग में सराबोर होरियारों की टोलियां नाचते गाते मस्ती करते हुए लोगों के घर-घर जाकर गाली देते हैं। पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के नवाबो के गांव शेरपुर में होली का अलग ही अंदाज है। यहां होली शूट द्वारा मनाई जाती है। ये होली हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, जो कई वर्षों से इसी तरह मनाई जा रही है।
गालियों के मुड़ने का उपहार है
पूरनपुर तहसील की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत शेरपुर में नवाबों का रुतबा रहा है। यहां के प्रसिद्ध नवाब खानदान के मरहूम शमशुल हसन खां सांसद भी हैं। यहाँ कई वर्षों से चली आ रही अनोखी होली अपनी खूबी के लिए प्रसिद्ध है। यहां होरियारों की टोलियां गालियां देते हुए नवाबो के गांव में उनके साथ होली खेल कर बारी में उपहार लेते हैं।
मुस्लिम समुदाय का मिलता है सहयोग
बता दें कि, इस गांव के लोग में पीढ़ीयों से चली आ रही इस परंपरा को बखूबी खेलते हुए आए हैं। आज तक इस गांव में कोई सांप्रदायिक घटना सामने नहीं है। फिर चाहे होलिका दहन के बाद होलिका स्थल की स्वच्छ सफाई हो या फिर होरियारों के साथ-साथ मे फगुआ गीत सब कुछ एक साथ करते हैं। जब होली आती है तो हिदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम भी उत्साहित हो जाते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग होलिका की तैयारी में सहयोग से कभी पीछे नहीं हटते। असली नजारा तो धुलेहड़ी के दिन से दिखता है।
दे गालियां हैं
धुलेहड़ी के दिन धमाल में शामिल रंग गुलाल से सराबोर होरियारों की टोलियां मुस्लिम परिवार के घरों के दरवाजे पर पहुंचती हैं और फिर गालियां देना शुरू कर देती हैं। गालियां देते हैं मुस्लिमों से फगुआ वसूलते हैं। प्यार भरा ये गालियों को सुनकर मुस्लिम समुदाय के लोग हंसते हुए फगुआ के तौर पर कुछ सामान होरियारों को प्रस्तुत करते हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि होली का ये रिवाज नवाबी दौर से ही चला आ रहा है। पीढि़यां बदल गई लेकिन रिवाज कायम है। गांव की आबादी करीब चालीस हजार की है। लगभग दो हज़ार हिन्दू हैं।
कोई बुरा नहीं मानता
खास बात ये है कि इस गांव में कभी भी सांप्रदायिक तनाव की समस्या नहीं आती है। होली पर हिदू समुदाय के लोग हुड़दंग करते हैं लेकिन कोई इसका बुरा नहीं मानता। होलिका स्थल की साफ-सफाई से लेकर अन्य तैयारियों में मुस्लिमों का पूरा सहयोग रहता है। रंग वाले दिन सुबह आठ बजे से धमाल शुरू हो जाता है। होरियारों की टोली सबसे पहले नवाब साहब की कोठी पर पहुंचती है। गेट पर खड़े होकर होरियारे गालियां देना शुरू करते हैं। ये इस बात का संकेत होता है कि होरियारे आ चुके हैं। अब उन्हें फगुआ देकर विदा करना है। नवाब की कोठी से फगुआ वसूलने के बाद टोली आगे बढ़ती जाती है। इसी तरह से गांव के अन्य प्रभावशाली मुस्लिमों के परिवारों के घरों के दरवाजे-दरवाजे पहुंचकर गालियां देते हैं और फगुआ वसूलने का सिलसिला चलता रहता है।
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