गुरु तेग बहादुर 400 वें प्रकाश पुरब: देश भर में आज सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400 वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। कोरोना के कारण गुरुद्वारों में को विभाजित प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। लोग गुरुद्वारों में मुख पहनकर मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार गुरुद्वारों में छोटे-छोटे कार्यक्रम ही किए जा रहे हैं। गुरुमति समागम हो रहे हैं। इस दिन गुरु साहिब के इतिहास और शहादत के बारे में बताया जाता है।
अपने धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांत की रक्षा के लिए विश्व इतिहास में जिन लोगों ने प्राणों की आहुति दी, उनमें गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान महत्व पंक्ति में हैं। यहां जानें गुरु तेग बहादुर जी के जीवन के बारे में –
– अमृतसर में जन्मे गुरु तेग बहादुर गुरु हरगोविन्द जी के पांच बेटे थे। 8 वें गुरु हरिकृष्ण राय जी के निधन के बाद वे 9 वें गुरु बने थे। में उसने आनन्दपुर साहिब का निर्माण कराया और ये वहीं रहने लगे।
– गुरु तेग बहादुर बचपन से ही बहादुर, निर्भीक स्वभाव के और आध्यात्मिक रुचि वाले थे। केवल 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ युद्ध में उन्होंने अपनी वीरता का परिचय दिया। इस वीरता से प्रभावित उनके पिता ने उनका नाम तेगडा यानी तलवार के धनी रख दिया।
– उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब की तमाम कोशिशों के बावजूद इस्लाम धारण नहीं किया और तमाम जुल्मों का पूरी दृढ़ता से सामना किया। औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहा तो गुरु साहब ने कहा कि शीश कटा सकते हैं।
– औरंगजेब ने गुरुजी पर कई अत्याचार किए, लेकिन वे अविचलित रहे। वह लगातार हिन्दुओं, सिखों, कश्मीरी पंडितों और गैर-मुस्लिमों का इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध कर रहे थे औरंगजेब खासा नाराज थे।
आठ दिनों की यातना के बाद गुरुजी को दिल्ली के चांदनी चौक में शीश काटकर शहीद कर दिया गया। उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बनाया गया जिसे गुरुद्वारा शीशगंज साहब नाम से जाना जाता है।
– अपने त्याग और बलिदान के लिए वह सही अर्थों में ‘हिन्द की चादर’ कहलाए।

पीएम मोदी ने भी ताड़का मत्था टेका
गुरु तेग बादल जी के 400 वें प्रकाश पर्व के मौके पर पीएम मोदी ने दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब में प्रार्थना की। पीएम मोदी गुरुद्वारे में बिना किसी सुरक्षा घेरे के गए थे।
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