Home Covid-19 कोरोना का कहर: वक़्त की जरुरत बन गया संपूर्ण लॉकडाउन लगाना ?
कोरोना का कहर: वक़्त की जरुरत बन गया संपूर्ण लॉकडाउन लगाना ?

कोरोना का कहर: वक़्त की जरुरत बन गया संपूर्ण लॉकडाउन लगाना ?

by Sneha Shukla

नई दिल्ली: कोरोना के बढ़ते कहर के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की मांग करके यह बहस छेड़ दी है कि क्या सचमुच यह वक़्त की ज़रूरत है और क्या यही एकमात्र विकल्प है। देश में हर रोज हो रही मौत का आंकड़ा देखें और डॉक्टरों की मानें, तो उस लिहाज से कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए पूर्ण लॉकडाउन ही प्रभावी हथियार है। लेकिन अगर देश की अर्थव्यवस्था की गिरती सेहत के साथ ही गरीब व कमजोर तबके के बारे में सोच हो, तो लगता है कि यह उन्हें आर्थिक बर्बादी की कगार पर ले जाएगा। हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र और राज्यों को लॉकडाउन पर विचार करने की सलाह दे चुका है लेकिन इस हिदायत के साथ कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कम पड़ना चाहिए।

इसी तरह यह भी सच है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी दुनिया के कई देशों ने अपने यहाँ पूर्ण लॉकडाउन लगाकर संक्रमण का प्रसार रोकने में काफी हद तक कामयाबी पाई है। लेकिन उन देशों की सरकारों ने लोगों को इसके कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई करने का पूरा इंतजाम किया। सिर्फ गरीब या नौकरीपेशा वर्ग को ही नहीं बल्कि छोटे व्यापारियों को भी हर महीने एक निश्चित राशि सरकार की तरफ से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और यह सिलसिला अभी तक कुछ देशों में जारी है।

इसका नतीजा यह हुआ कि ऐसे देशों के नागरिकों को जरा भी यह महसूस नहीं हुआ कि लॉकडाउन का उनका जीवन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है। इसके उलट भारत में पहली लहर के दौरान ही पूर्ण लॉकडाउन के बेहद भरावह परिणाम देखने को मिले हैं।

लिहाजा कह सकते हैं कि अगर जहान बचाना है, तो पहले जान बचानी होगी और इसके लिए पूर्ण लॉकडाउन को ही कोरोना की वैक्सीन मानना ​​होगा। लेकिन यह फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के बारे में न सिर्फ गंभीरता से सोचना होगा बल्कि उस पर तत्काल अमल करने का ऐलान भी करना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने दो दिन पहले ही कहा था कि “लॉकडाउन लगाने से पहले सरकार ये भी सुनिश्चित करती है कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कम पड़े। कोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों पर लॉकडाउन का असर पड़ सकता है उनके लिए खास इंतज़ाम किए जाएं। “

इशारा साफ है कि सरकार पहले उन वर्गों के आर्थिक नुकसान की भरपाई का इंतज़ाम करे, जिनके लिए ये एक बड़ी मार साबित होगी। राहुल गांधी ने भी मंगलवार को सरकार से ये मांग करते हुए कमोबेश सुप्रीम कोर्ट की दी हुई हिदायत को ही आगे बढ़ाया है। उन्होंने पूरे लॉक डाउन को ही ट्रांसफर रोकने का एकमात्र उपाय बताते हुए कहा कि इस दौरान, समाज के कमजोर तबके के लिए न्यूनतम आय सुनिश्चित करना यानी ‘न्याय’ की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत सरकार की निष्क्रियता कई निर्दोष लोगों की जान ले रही है। उन्होंने यह भी कहा, ” मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार के पास रणनीति का पूरा अभाव है इसलिए लॉकडाउन एकमात्र विकल्प बचा है। ” ‘

अभी तक दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ही ऐसी इकलौती राज्य सरकार है जिसने गरीब व कमजोर वर्ग के लिए दो महीने का मुफ्त राशन देने और ऑटो-टैक्सी चालकों को हर महीने पांच हजार रुपये देने की घोषणा करके लॉक डाउन से हुई जख्मों को कुछ हद तक तक मरहम लगाने का काम किया। सागर करने की नीयत हो, तो केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी ही कुछ जनहित की घोषणा करके करोड़ों देशवासियों को राहत दे सकती है।

इसी तरह पिछले 13 दिनों से लगातार तीन लाख से ऊपर ही कोरोना के नए मामले आ रहे हैं। कोरोना पर नियंत्रण के लिए कई राज्यों ने सख्त पाबंदियां लगाई हैं, बावजूद इसके स्थिति में आने के बाद अब तक दिखाई नहीं पड़ रहा है।

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