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चाणक्य नीति: ऐसे माता-पिता बच्चों के लिए होते हैं दुश्मन समान! जानिए क्या कहती है आज की चाणक्य नीति

by Sneha Shukla

बेहतर पालन-पोषण, अच्छे संस्कार और श्रेष्ठ शिक्षा व्यक्ति को सुखी जीवन जीने में मदद करता है। चाणक्य ने अपने ग्रंथ अर्थात चाणक्य नीति में व्यक्ति के जीवन के कई पहलुओं का वर्णन किया है। चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं और लोगों को सुखी और खुशहाल जीवन रहनेाने में मदद करते हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने माता-पिता को लेकर भी कई बातें लिखी हैं। आज पढ़िए

माता शत्रु: पिता वैरी येन बालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ।।

जिन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया नहीं, ऐसे माता-पिता बच्चों के लिए शत्रु के समान होते हैं। क्योंकि अनपढ़ बालक विद्वानों के बीच मान-सम्मान नहीं पाता है। उसका हमेशा अपमान किया जाता है। विद्वानों के बीच ऐसे लड़के की स्थिति ऐसी होती है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है।

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चाणक्य का कहना है कि व्यक्ति केवल जन्म लेने भर से शिक्षित नहीं हो जाता है। कद-काठी, सूरत, आकार-प्रकार यह मनुष्यों का एक जैसा हो सकता है। लेकिन समझदारी और समझदारी ही उन्हें एक-दूसरे से अलग बनाती हैं।

जिस तरह से सफेद बगुला सफेद हंसों में बैठकर हंस नहीं बन जाता है। ठीक उसी तरह से शिक्षित व्यक्तियों के बीच अशिक्षित व्यक्ति बैठतक शोभा नहीं पाते हैं। ऐसे में माता-पिता का यह फर्ज है कि वह अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा दें, जिससे उन्हें समाज में मान-सम्मान मिल सके।

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