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दिव्य संयोग में शुरू हो रहे नवरात्र, भक्तों की मनोकामनाएं होंगी पूरी 

by Sneha Shukla

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चैत्र माह में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 13 अप्रैल को जब चंद्रमा मेष राशि चित्रा नक्षत्र में रहेंगे, देर रात सूर्य भी मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इस दिन से नवरात्रि पर्व विक्रम सम्वत 2078 प्रारंभ हो रहा है। हिंदू धर्म के अनुसार नववर्ष चैत्र मास कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होता है, जबकि अंग्रेजी पंचांग से 29 मार्च से चैत्र मास आरंभ हो चुका है। नवरात्रि में माता के वाहन का विशेष महत्व है। इस बार मांश्वर पर सवार होकर आ रहे हैं। मेदिनी ज्योतिष में माँ के वाहन से सुख समृद्धि का पता चल रहा है। अश्व की सवारी का अर्थ प्रकृतिक आपदाओं, सत्ता में उथल-पुथल जैसी विपदा आ सकता है। पंचांग के अनुसार नवरात्र में इस बार कोई तिथि क्षय नहीं होगी जो विशेष हितकारी है। नवरात्रि पर्व पर मां की आराधना के साथ व्रत-उपवास और पूजन का विशेष महत्व है। जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन, मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार इन नौ दिनों में माता को प्रत्येक दिन के अनुसार भोग या प्रसाद अर्पित करने से देवी मां सभी प्रकार की समस्याओं का नाश करती हैं।
आज से गुरु गोचर हो रहा है, 13 सितंबर तक कुंभ राशि रहेगी
देव गुरु बृहस्पति मंगलवार को मंत्र राशि से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में देव गुरु 13 सितंबर तक गोचर करेंगे। बृहस्पति 20 जून को वक्री तक 14 सितंबर को पुनः मकर राशि में वापस आयांगे और 20 नवंबर तक मकर में ही रहेंगे। इसके विभिन्न राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

इस ग्राफ़ में दी गई धार्मिक धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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