<पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> बरेली: strong> उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक तरफ जहां कोरोना कहर बरपा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय अस्पताल की लापरवाही भी कम होने का नाम नहीं ले रही है। बरेली के एपेक्स अस्पताल ने तो लापरवाही की सभी हनों को ही पार कर दिया। अस्पताल ने दो परिजनों को अलग-अलग बॉडी दे दी। जिसको बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हांगमा किया और अस्पताल के स्टाफ को पोल से बांधकर पीटा।"पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> किसी और की निकली डेड बॉडी और nbsp; strong>
डॉक्टर को भगवान ने कहा जाता है लेकिन बरेली में इस भगवान ने लापरवाही की सभी सीमाओं को पीछे छोड़ दिया है। मामला बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र में बने एपेक्स अस्पताल का है। दरअसल, कटरा चांद खान के महेश कुमार गुप्ता की कोविड रिपोर्ट आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां महेश कुमार की देर रात मौत हो गई। परिजनों को अस्पताल का बिल भरने करने के बाद बॉडी दी गई, साथ ही ये शर्त रखी गई कि कोई इसको खोलकर नहीं देखेगा। लेकिन, बॉडी हल्की होने पर परिजनों ने शव को खोलकर देखा तो बॉडी महेश की नहीं बल्कि किसी वृद्ध व्यक्ति की थी। इसके बाद के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। p>
अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है जवाब & nbsp; strong>
अस्पताल की लापरवाही यहीं खत्म नहीं हुई। दूसरे को डिवाइड मरीज राकेश की मौत भी एपेक्स अस्पताल में हुई। बिल जमा करने से पहले उनके परिजनों को बॉडी छूने भी नहीं दिए गए, उन्हें भी सील बॉडी को खोलने की अनुमति नहीं थी। लेकिन श्मसान भूमि में चिता पर रखते हुए जब चेहरा को खोलकर देखा गया तो डेड बॉडी राकेश की नहीं थी। उनके परिजन भी अस्पताल पहुंचे और जमकर हंगामा किया। पूरे मामले में गौर करने वाली बात ये है कि ये दोनों की डेड बॉडी में अदला बदली नहीं हुई है। क्योंकि, महेश की बॉडी कहां गई इस बारे में अस्पताल प्रशासन कुछ भी नहीं बता पा रहा है।
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कार्रवाई की मांग strong>
मामले में अस्पताल के डॉक्टरों से बात की गई तो वो उल्टा मीडिया पर ही भड़क गई और डेड बॉडी के बदलने के एपिसोड को खत्म से ही नाकार दिया। जबकि, अस्पताल के बाहर परिजन हंगामा कर रहे थे। मौके पर पहुंचे भारी पुलिस बल ने परिजनों को समझने की कोशिश की लेकिन परिजन मामले में अस्पताल प्रशासन पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। & nbsp; p>
आपदा को अवसर के रूप में देख रहे हैं अस्पताल strong>
यह कोई पहला मामला नहीं है जब प्राथमिक अस्पताल की लापरवाही उजागर हुई है। कोरोना काल मे हॉस्पिटलों को ज्यादा सजग रहने की जरूरत है लेकिन बरेली के अस्पताल में इस आपदा को अवसर के रूप में देखते हुए विकृति में लगे हुए हैं। वही, इस मामले में एसीएमओ का कहना है कि यह मानवीय भूल हो सकती है। उनका कहना है कि मामले की जांच करवाई जा रही है। p>
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