एजेंसी, नई दिल्ली
द्वारा प्रकाशित: देव कश्यप
अद्यतित Tue, 13 Apr 2021 04:55 AM IST
कोरोना वायरस टीकाकरण
– फोटो: पीटीआई
ख़बर सुनना
विस्तार
राष्ट्रीय रोग प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान दिल्ली के वैज्ञानिक सत्यजीत रथ के अनुसार, टीकाकरण महामारी को रोकने के विभिन्न तरीकों में से एक है। यह कोई जादुई या एकमात्र तरीका नहीं है। पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजूकेशन एंड रिसर्च की वैज्ञानिक विनीता बाल के अनुसार आज लागू किए जा रहे किसी भी टीके में एक व्यक्ति से दूसरे में वायरस को फैलने से रोकने की क्षमता नहीं है। यह केवल चेतन व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार होने से बचा सकता है। जब तक बहु आबादी आबादी कोके नहीं लग जाती, सभी को संकाय पहनना और एक दूसरे से दूरी रखना आवश्यक है।
टीकाकरण से यह फायदा होगा
रथ के अनुसार टीके से व्यक्ति में इस तरह के विकसित होते हैं जो इस वायरस को खत्म कर सकते हैं। टीकाकरण से व्यक्ति का बचाव करता है, पूरे समुदाय का नहीं। यह भी संभव है कि निकट भविष्य में वायरस का ऐसा स्वरूप विकसित हो जाए जिस पर टीका असर ही न करे। इसलिए अगली पीढ़ी के टीके पर भी हमें तेजी से काम करना चाहिए।
हर्ड इम्यूनिटी में कई बाधाएं हैं
वैज्ञानिकों के अनुसार, बड़ी संख्या में टीकाकरण होने पर हर्ड इम्युनिटी विकसित हो सकती है, यानी बड़ी आबादी पर वायरस असर नहीं पाया जा सकेगा। लेकिन इसके लिए कितनी आबादी को टीका लगाना होगा, यह अभी वैज्ञानिक तय नहीं कर पाए हैं क्योंकि यह नया वायरस है। ऐसे में सभी कोक लगाना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अभी भी इटेक गर्भवती महिलाओं या 12 साल से छोटे बच्चों पर परीक्षण से नहीं गुजरा है, ऐसे में सभी का टीकाकरण होने के कई मामलों में हैं।)
।
