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Wahiduddin Khan

दुखद : पद्मविभूषण से सम्मानित मशहूर गांधीवादी विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन का कोरोना से निधन

by Sneha Shukla

एजेंसी, नई दिल्ली।

द्वारा प्रकाशित: जीत कुमार
अपडेटेड थू, 22 अप्रैल 2021 01:37 AM IST

ख़बर सुनकर

प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और गांधीवादी लेखक मौलाना वहीदुद्दीन खान का बुधवार को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें कोरोना शरीफ पाए जाने के बाद 12 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौलाना के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने यहां अपोलो अस्पताल में बुधवार रात को आखिरी सांस ली।

‘मौलाना’ के नाम से प्रसिद्ध वहीदुद्दीन खान को इसी साल जनवरी में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मविभूषण से नवाजने की घोषणा केंद्र सरकार ने की थी। कुरान का समकालीन अंग्रेजी में पढ़े के लिए मशहूरी पाने वाले मौलाना को इससे पहले साल 2000 में उनमें देश के तीसरे नंबर के नागरिक सम्मान पद्मभूषण से भी नवाजा जा चुका है।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के बधरिया गांव में 1925 में पैदा हुई मौलाना की पहचान शांति के लिए काम करने वाली बड़ी हस्तियों में की जाती थी। वर्तमान में दिल्ली में रहने वाले मौलाना को दुनिया के 500 सबसे प्रभावी मुस्लिमों की सूची में भी शामिल किया गया था।

खासतौर पर उनकी चर्चा ‘इस्लाम में महिलाओं के अधिकार’, ‘कांसेप्ट ऑफ जिहाद’, ‘विमान अपहरण-एक अपराध’ जैसे लेखों के लिए की जाती है।

मिल्ड कई बड़े सम्मान थे
मौलाना वहीदुद्दीन को पद्मविभूषण व पद्मभूषण के अलावा भी कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें सोवियत संघ के आखिरी दिनों में वहाँ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव पूर्व द्वारा डेमिर्गस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड, मदर टेरेसा की तरफ से नेशनल सिटीजंस अवॉर्ड और राजीव गांधी राष्ट्रीय उपलब्धि संभावना (2009), अबजजबी में सैयदियाना इमाम अल हसन इब्न अली शांति सम्मान (2015) ) से भी सम्मानित किया गया था।

विस्तार

प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और गांधीवादी लेखक मौलाना वहीदुद्दीन खान का बुधवार को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें कोरोना शरीफ पाए जाने के बाद 12 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौलाना के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने यहां अपोलो अस्पताल में बुधवार रात को आखिरी सांस ली।

‘मौलाना’ के नाम से प्रसिद्ध वहीदुद्दीन खान को इसी साल जनवरी में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मविभूषण से नवाजने की घोषणा केंद्र सरकार ने की थी। कुरान का समकालीन अंग्रेजी में पढ़े के लिए मशहूरी पाने वाले मौलाना को इससे पहले साल 2000 में उनमें देश के तीसरे नंबर के नागरिक सम्मान पद्मभूषण से भी नवाजा जा चुका है।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के बधरिया गांव में 1925 में पैदा हुई मौलाना की पहचान शांति के लिए काम करने वाली बड़ी हस्तियों में की जाती थी। वर्तमान में दिल्ली में रहने वाले मौलाना को दुनिया के 500 सबसे प्रभावी मुस्लिमों की सूची में भी शामिल किया गया था।

खासतौर पर उनकी चर्चा ‘इस्लाम में महिलाओं के अधिकार’, ‘कांसेप्ट ऑफ जिहाद’, ‘विमान अपहरण-एक अपराध’ जैसे लेखों के लिए की जाती है।

मिल्ड कई बड़े सम्मान थे

मौलाना वहीदुद्दीन को पद्मविभूषण व पद्मभूषण के अलावा भी कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें सोवियत संघ के आखिरी दिनों में वहाँ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव पूर्व द्वारा डेमिर्गस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड, मदर टेरेसा की तरफ से नेशनल सिटीजंस अवॉर्ड और राजीव गांधी राष्ट्रीय उपलब्धि संभावना (2009), अबजजबी में सैयदियाना इमाम अल हसन इब्न अली शांति सम्मान (2015) ) से भी सम्मानित किया गया था।

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