पट: कोरोनावायरस के दूसरे तनाव से हर तरफ लोगों की परेशानी और चित्कार दिख रही है। ऐसे में राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार की नजरें इसपर टिकीं हैं कि कैसे इस वायरस को खत्म किया जा सकता है। लगातार इस दिशा में कलाई हो रही है कि रोगियों को वेंटिलेटर, बिस्तर या फिर ऑक्सीजन की कमी ना हो। बिहार में बढ़ रहे आंकड़े, यहां की व्यवस्था और आने वाले समय में क्या कुछ हो रहा है। उन्हें बातचीत के लिए प्रमुख अंश दें।
वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर प्रत्ययधर राज ने कहा कि अभी गंभीर आपदा का समय है। हमारे सामने अभी दो तरह की कठिनाइयों हैं। सबसे पहले लोगों के मन में जो डर है वह खत्म कर देगा। लोगों को सूचना दी जा रही है कि कितने दिनों तक क्या करना है और क्या नहीं करना है। हर जिले में कोविड कैर सेंटर बने हैं जो ऑक्सीजन बेड के साथ हैं। पटना के अस्पतालों में प्रेशर ज्यादा है इसलिए विशेष चीजों पर ध्यान दिया जा रहा है।
पूछ के बाद राज्य को मिले हैं डिफेंस के डॉक्टर्स
उन्होंने कहा कि बीते साल बिहटा अस्पताल को तैयार किया गया। पीएम कैर फंड से वहाँ डीआरडीए की ओर से 500 बिस्तर के संचालन की व्यवस्था की गई थी। इसबार भी भारत सरकार से अनुरोध के बाद डिफेंस के कुछ मेडिकल डॉक्टर्स मिले हैं। बिहटा में अभी 50 बिस्तर ही कार्यरत हैं। हमारा लक्ष्य है कि उसको शीघ्र उठकर 150 से 200 कर दें हम।
पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में जो भी व्यवस्था थी पिछले साल वह भी एक संस्था द्वारा ही की गई थी। इस वर्ष भी डॉ और लोगों के सहयोग से इसे संचालित किया जा रहा है। यहाँ देखा जा रहा है कि वे अभी भी मदद की क्या-क्या आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य है कि यह रविवार से शुरू कर दें। इसके अलावा राजेंद्र नगर आई अस्पताल में नई भागीदारी तैयार है। वहां भी सौ बिस्तर की तैयारी कर ली गई है।
पीएमसीएच के 75 प्रतिशत बिस्तर को विभाजित के लिए आरक्षित
प्रत्यय अम्रित ने कहा कि आज के दिन में जो वास्तविक चुनौती है, वह ये है कि अभी भी जो व्यक्ति व्यक्ति हो रहा है और जो माइल्ड है, स्टेटेट उन्हें किस तरह से ट्रीट किया जाए। जिस प्रकार का संक्रमण अभी देखने को मिल रहा है वह बहुत ही कम अवधि में माइल्ड से जलवायुेट में पहुंच जा रहा है। इसको जीवित करने के लिए जो भी हमारे आईसीयू वाले अस्पताल हैं वो लगे हुए हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए एक और निर्णय लिया गया है और पीएमसीएच में 75 प्रतिशत बिस्तर को विभाजित के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
एम्स में 250 बिस्तर की सुविधा, बढ़ाई होगीगी स्थाई व्यवस्था
अब तीन बड़े अस्पताल को कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है, दरभंगा मेडिकल कॉलेज और मुजफ्फरपुर कॉलेज में भी 75 प्रतिशत बिस्तर को विभाजित के लिए रिजर्व कर दिया गया है। पटना में आईजीआईएमए, पीएमसीएच, एम्स और एनएमसीएच को विभाजित डिडिकेटेड कर दिया गया है जिसमें एम्स में 250 बिस्तर की सुविधा है। यह भी कोशिश कर रहे हैं कि जो भी स्थाई व्यवस्था है उसको और तेजी से कैसे बढ़ाया जाए।
संविदा पर बहाल किए गए एक हजार डॉ
मुख्य सचिव ने कहा कि शुक्रवार को क्रेन की बैठक में तीन महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पहला ये कि एक हजार डॉ। संविदा पर बहाल होंगे। अगले दस से 15 दिन में ही हम सेवा ले सकते हैं। दूसरी चुनौती ऑक्सीजन के स्टोरेज टैंक की है, उसके लिए भी आज काउंटर में मंजूरी मिली है और 14 स्टोरेज टैंक लगाए जा रहे हैं। पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस और डीएमसीएच में दो दो टैंक लग रहे हैं। बाकी छह संस्थानों में एक एक टैंक लगेंगे। एक टैंक लगभग 20 हजार लीटर का है। कोशिश है कि अगले एक महीने के अंदर ये टैंक स्थापित हो जाएं।
प्राथमिक अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी
ऑक्सीजन की कमी को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इस संबंध में एबीपी को प्रत्यय अम्रित ने बताया कि टीम लगातार फील्ड डेवलपर कर रही है। सभी मेडिकल कॉलेज से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फीडबैक लिया गया है। प्राथमिक अस्पताल में तो ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी शुरू है। कुछ अस्पताल ने ऑक्सीजन प्लांट पहले से ही लगाया है।
कोरोना की चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती हमारे सामने ये है कि हमारे काबिल स्कूल तक्शिशियन की बड़ी संख्या में अस्थिर हुए हैं। ऐसी स्थिति में केरल को दो से तीन दिन बंद करना पड़ रहा है। डेटा एंट्री ऑपरेटर भी काफी संख्या में निष्क्रिय हैं। चुनौती गंभीर है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि लोगों को गलत सूचना मिली। हमलोगों का दायित्व है कि जो भी जांच करें उन्हें एक तय समय सीमा के अंदर रिपोर्ट दे दें।
इस बार के स्ट्रेन को समझने की जरूरत है
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इसबार का जो स्ट्रेन है इसको समझने की जरूरत है। कई लोगों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव है लेकिन उनके सभी सिम्टम्स को विभाजित के हैं और उनकी सिटी स्कैन से कोविड की पुष्टि हो रही है। ऐसे केस के लिए सभी मेडिकल कॉलेज में अलग से व्यवस्था की गई है। सभी जगह 25 बिस्तर की अलग व्यवस्था की गई है। जो बाहर से आ रहे हैं और उन्हें अपने गांव में परेशानी है, तो उनके लिए चार दिनों के लिए सभी जिले के पारंडल मुख्यालय में बड़े पैमाने पर क्वारंटाइन केंद्र बनाए गए हैं जहां वे चार दिन तक रह सकते हैं। वहाँ उनका टेस्ट होगा और रिपोर्ट निगेटिव आने तक घर में आइसोलेट रहेगी।
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