Home panchaang-puraan Amalaki Ekadashi 2021: 24 या 25 मार्च जानिए किस दिन है आमलकी एकादशी? नोट कर लें पूजा व्रत पारण का शुभ मुहूर्त
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Amalaki Ekadashi 2021: 24 या 25 मार्च जानिए किस दिन है आमलकी एकादशी? नोट कर लें पूजा व्रत पारण का शुभ मुहूर्त

by Sneha Shukla

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फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। इसे एकादशी तिथि को आंवला और रंगभरनी एकादशी भी कहा जाता है। इस वर्ष आमलकी एकादशी की तिथि को लेकर लोगों के बीच कंफ्यूजन है। कुछ लोगों का मत है कि एकादशी का व्रत 24 मार्च को रखा जाएगा, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि 25 मार्च को एकादशी है। अगर आप भी आमलकी एकादशी की तिथि को लेकर संदेह में हैं तो जानिए यहां सही डेट-

आमलकी एकादशी कब है?

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत हमेशा उदया तिथि में रखा जाता है। 24 मार्च की सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक दशमी के बाद एकादशी तिथि लगेगी। जो 25 मार्च को सुबह 09 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। ऐसे में 25 मार्च को उदया तिथि में एकादशी व्रत रखा जाएगा।

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आमलकी एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त

एकादशी व्रत पारण का समय – 26 मार्च को सुबह 06:18 बजे से 08:21 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक।
अमृत ​​काल – रात 09 बजकर 13 मिनट से रात 10 बजकर 48 मिनट तक।
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 53 मिनट से सुबह 05 बजकर 41 मिनट तक।

आमलकी एकादशी व्रत कथा-

प्राचीन काल में चित्रसेन नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में एकादशी व्रत का बहुत महत्व था और सभी प्रजेशन एकादशी का व्रत करते थे। वहीं राजा की आमलकी एकादशी के प्रति बहुत श्रद्धा थी। एक दिन राजा शिकार करते हुए जंगल में बहुत दूर निकल गए। केवल कुछ जंगली और पहाड़ी डाकुओं ने राजा को घेर लिया। इसके बाद डाकुओं ने शस्त्रों से राजा पर हमला कर दिया। मगर देव कृपा से राजा पर जो भी शस्त्र चलाए जाएं वो पुष्प में बदल जाते हैं।

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डाकुओं की संख्या अधिक होने से राजा संज्ञाहीन होकर धरती पर गिर गया। केवल राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और सभी लोगों को मारकर अदृश्य हो गए। जब राजा की चेतना लौटी तो, उसने सभी लोगों का मरा हुआ पाया। यह देख राजा को आश्चर्य हुआ कि इन डाकुओं को किसने मारा? केवल आकाशवाणी हुई- हे राजन! यह सब राक्षस आपके आमलकी एकादशी का व्रत करने के प्रभाव से मारे गए हैं। आपकी देह से उत्पन्न आमलकी एकादशी की वैष्णवी शक्ति ने इनका संहार किया है। उन्हें मारकर वहाँ पुन: आपके शरीर में प्रवेश कर गया। यह सुनकर राजा प्रसन्न हुआ और वापस लौटकर राज्य में सबको एकादशी का महत्व बतलाया।

(इस आलेख में दी गई जानकारी धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जो केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया गया है।)



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