चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल दिन मंगलवार से शुरू हो गए हैं। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शुभ पैरों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पाठ को करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं करती हैं। दुर्गा सप्तशती पाठ को कुल 13 अध्याय में बांटा गया है। इस पाठ को करने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम और नियम विवरण है। जानिए दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम व नियम, जिनका पालन करने से मां दुर्गा अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के विशेष नियम-
1. दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय भक्त को शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले स्नानादि करके वस्त्र वस्त्र धारण करना चाहिए।
3. बैठने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग करें अगर आपके पास कुशा का आसन नहीं है तो ऊन के बने हुए आसन का प्रयोग कर सकते हैं।
4. पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी और सभी देवगणों को प्रणाम करें। माथे पर चंदन या रोली का तिलक पाते हैं।
5. लाल पुष्प, अक्षत और जल माता को अर्पित करते हुए पाठ का संकल्प लें।
6. पाठ को आरंभ करने से पहले उत्कीलन मंत्र का जापकरें। इस मंत्र को आरंभ और अंत में 21 बार जप करना चाहिए।
7. माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए पाठ का आरंभ करें। इस तरह से मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
दोस्तों को ये नवरात्रि बस शुभकामना संदेश और बोलें- ‘हैप्पी नवरात्रि’
सावधानियां-
1. दुर्गा सप्तशती का पाठ न ज्यादा तेज स्वरूप में करें न ज्यादा धीमी आवाज में करें।
2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए।
3. यदि आप एक दिन में पाठ पूरा नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम जो अध्याय आरंभ किया है, उसे पूरा करना चाहिए।
।
