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कोरोना होने पर जहां लोग अपनों से मिलने में भी कतरा रहे हैं। वहाँ कई कोरोनाटिक शवों को अपने परिजनों का कंधा भी नसीब नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लखनऊ की वर्षगांठ वर्मा मिसल बन कर उभरी हैं। वर्षा कोरोनाटे शस को उनके घरों या शमशान में ले जाने का पुण्य कार्य कर रहा है। इस दौरान सभा ने एबीपी गंगा को बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपनी बर्थ फ्रेंड को खो दिया था, उस समय शव को ले जाने के लिए एकर्न्स ना मिलने के मलाल ने उन्हें ये पुण्य कार्य करने को प्रेरित किया। देखिए ये विशेष रिपोर्ट … p>
