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हरिद्वार। एक अप्रैल से लगने वाले महाकुंभ के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से जुटे साधु-संत यहां अलग-अलग रूप में दिख रहे हैं। दुनिया के सबसे छोटे बाबा और हठी बाबा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 18 इंच लंबे छोटे बाबा की दूर-दूर से श्रद्धालु आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। तो वहीं हठी बाबा पिछले 25 सालों से खड़े होकर ही तपस्या कर रहे हैं।
छोटे बाबा की हाइट 18 इंच और वजन 18 किलो है
नारायण नंद गिरी महाराज को दुनिया का सबसे छोटा बाबा कहा जाता है। नारायण नंद गिरी महाराज जूना अखाड़े के नागा बाबा हैं। उनकी लंबाई सिर्फ 18 इंच है। वजन भी सिर्फ 18 किलो ही है। हालांकि बाबा की उम्र करीब 56 साल है। वो झांसी से हरिद्वारंभ आए हैं। बाबा नंद गिरी महाराज श्री पंच दशनाम पूना अखाड़े के पास में ही ललितारो पुल के पास हनुमान मंदिर में डेरा जमाए हैं। यहीं पर सुबह 7 बजे से शाम तक भक्तों के दर्शन के लिए मौजूद रहते हैं।
बाबा ने ली है नागा संन्यासी की दीक्षा
नारायण नंद गिरी बताते हैं कि वह मध्य प्रदेश के झांसी के रहने वाले हैं। 2010 के हरिद्वार महाकुंभ में वे जूना अखाड़े में शामिल हुए और नागा संन्यासी की दीक्षा ली। पहले उनका नाम सत्यनारायण पाठक था, लेकिन संन्यास की दीक्षा लेने के बाद इनका नाम नारायण नंद गिरी महाराज हो गया। बाबा नारायण नंद गिरी महाराज ठीक से सुन भी नहीं पाते और ना ही चल पाते हैं। इससे पहले उनकी जीवन कठिनाइयों से भरा रहा है, लेकिन संन्यासी जीवन में आने के बाद उन्हें शिव भक्ति ने जीवन को जीने की लालसा दी है और इसी तरह से वह शिव भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को जी रहे हैं। नारायण नंद गिरी महाराज के चलने-फिरने में असमर्थ हैं इसीलिए उनका एक शिक्षक उमेश उनके साथ हमेशा रहता है, जो उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में मदद करता है।
25 साल से खड़े होकर तपस्या कर रहे खड़ेश्वरी बाबा
कुंभ में ऐसे एक बाबा भी आए हैं जो पिछले 25 सालों से खड़े होकर ही तपस्या कर रहे हैं। 25 साल से ना तो वह बोलते हैं और ना ही उन्होंने अन्न ग्रहण किया है। इसीलिए इनका नाम खड़ेश्वरी बाबा पड़ गया है। उनका असली नाम विद्यासागर महाराज है। सामान्य दिनों में दिल्ली के यमुना के किनारे करोल बाग में निवास करते हैं। तमाम भक्त उनसे आशीर्वाद लेने बैरागी कैंप पहुंच रहे हैं। बाबा खड़ेश्वरी महाराज 25 साल से खड़े होने के साथ ही सभी अभ्यास करते हैं जिनके लिए उनके सिद्धांतों हमेशा साथ ही रहते हैं। इतना ही नहीं बाबा खंडेश्वरी महाराज पिछले 25 सालों से मौन है और उन्होंने अन्न भी त्याग रखा है बस फल खाकर ही जीवन को जी रहे हैं।
खड़ेश्वरी महाराज किसी से बात नहीं करते केवल इशारों से ही समझाते हैं। खड़ेश्वरी महाराज के सहयोगी संत महंत खुशाल गिरी जी बताते हैं कि मानव जाति के कल्याण और विश्व शांति के लिए ही संत ने यह हठयोग अपनाया है। जहां कहीं भी कुंभ मेले का आयोजन होता है वहां खड़ेश्वरी महाराज वहां जरूर जाते हैं।
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