Home » Pradosh Vrat May 2021: मई महीने का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें इस दिन कैसी रहेगी सूर्य व चंद्रमा की स्थिति
DA Image

Pradosh Vrat May 2021: मई महीने का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें इस दिन कैसी रहेगी सूर्य व चंद्रमा की स्थिति

by Sneha Shukla

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, त्रयोदशी भगवान शिव को समर्पित होती है। ऐसे में प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। हर महीने दो प्रदोष व्रत आते हैं। पहला शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है। मई महीने का पहला प्रदोष व्रत 08 मई, दिन शनिवार को रखा जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है।

शनि प्रदोष व्रत के दिन होने से प्रीति योग-

शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रीति योग बन रहा है। प्रीति को अधिकांश शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए यह शुभ मुहूर्त में गिना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूरी तरह से चली जाती हैं।

मेष राशि वाले होते हैं पसंदीदा और जिद्दी, जानिए उनके स्वभाव और व्यक्तित्व के बारे में क्या कहते हैं ज्योतिष शास्त्र

चंद्रमा व सूर्य की स्थिति-

शनि प्रदोष व्रत के दिन चंद्रमा मीन राशि में व सूर्य मेष राशि में रहेंगे। इस दिन सूर्य नक्षत्र भरणी रहेगा।

क्या होता है प्रीति योग-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रीकि योग आपसी प्रेम को बढ़ाता है। अक्सर मेल-मिलाप बढ़ाने, प्रेम विवाह करने और अपने रूठे दोस्तों और संबंधियों को मनाने के लिए प्रीति योग में ही प्रयास करने से सफलता मिलती है। इसके अलावा झगड़े निपटाने या प्रतिबद्धता करने के लिए भी यह योग शुभ होता है। इस योग में किए गए कार्य से मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

वैशाख महीना 28 अप्रैल: आज से शुरू हुआ वैशाख का महीना, इस महीने सर्वार्थसिद्धि योग सहित 12 शुभ मुहूर्त हैं

प्रदोष व्रत नियम-

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत यूं तो निर्जला रखा जाता है इसलिए इस व्रत में फलाहार का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत को पूरे दिन के लिए रखा जाता है। सुबह नित्य कर्म के बाद स्नान करें। व्रत संकल्प लें।) फिर दूध का सेवन करें और पूरे दिन उपवास धारण करें। शाम को भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा करने से शुभ पैरों की प्राप्ति होती है।

08 मई को बनने वाले शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:00 ए एम, मई 09 से 04:43 ए एम, 09 मई तक।
अभिजित मुहूर्त- 11:39 ए एम से 12:32 पी एम तक।
विजय मुहूर्त- 02:18 पी एम से 03:12 पी एम तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:31 पी एम से 06:55 पी एम तक।
अमृत ​​काल- 09:31 ए एम से 11:16 ए एम तक।
निशिता मुहूर्त- 11:44 पी.एम. से 12:26 ए एम, 09 मई तक।

Related Posts

Leave a Comment