Home States UP: जान गंवा रहे लोग, धूल फांक रहे वेंटिलेटर, जालौन के जिला अस्पताल का हाल बेहाल
UP: जान गंवा रहे लोग, धूल फांक रहे वेंटिलेटर, जालौन के जिला अस्पताल का हाल बेहाल

UP: जान गंवा रहे लोग, धूल फांक रहे वेंटिलेटर, जालौन के जिला अस्पताल का हाल बेहाल

by Sneha Shukla

<पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> जालौन: जहां एक ओर देश ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर जालौन की जिला अस्पताल में रखे वेंटिलेटर यहां की शोभा बढ़ाते हैं। पीएमकेयर फंड से लाखों की लागत खर्च करके यहां वेंटिलेटर भेजे गए जो कि अब जिला अस्पताल में पड़े-पड़े धूल फांकने का काम कर रहे हैं।

10 वेंटीलेटर शो पीस बन गए

बता दें कि, एक करोड़ की लागत से स्थापित दस वेंटीलेटर जिला अस्पताल में सिर्फ शो पीस बनकर रह गए हैं। कोरोना काल की शुरुआत में जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड को जब आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया गया था, तब पीएमकेयर फंड से 10 शैया को विभाजित कक्ष में 10 वेंटीलेटर को स्थापित किया गया था। [pstyle=।"पाठ-संरेखित करें: औचित्य;">

विशेषज्ञ डॉक्टर की परीक्षाक्ती नहीं हो पा रही है

लेकिन ऑपरेटर व स्टाफ की कमी के कारण वेंटिलेटर की सिड्स फूल रही हैं। आ चार्टर की बात करें तो जिले में बीते 7 दिनों में 50 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इसके बाबों की कमी के अभाव में जिले के बाशिंदों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेपटरी हुई स्वाथ्य सेवाओं का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि, शासन-प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक आज तक एक विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति नहीं करा पा रहे हैं। अंत में जिला की सेटिंग अधिकारी जो कदर तैयार कर रहें है, अगर इसी तरह चलता रहा तो हालात परेशानी खड़े करने वाले हो सकते हैं।

जान गंवा रहे लोग

वर्तमान में जिले में 1907 कोरोना के मरीज सक्रिय हो चुके हैं और 117 मौतें भी हो चुकी हैं। ये बहुत सारे ऐसे ज़रूरतमंद लोग हैं, जिन्हें वेंटीलेटर की ज़रूरत है और इसके अभाव के कारण लोग अपनी जान भी गवां रहे हैं। वहीं, इस मामले की उदासीनता की जानकरी जिला अस्पताल के सीएमसी से करनी चाही तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया और बताया कि कई बार डीएम कमिश्नर और अपर निदेशक को मामले को अवगत कराने के बाद हर महीने स्टाफ ए जाने की मांग की। जा रहा है, लेकिन फिर कोई कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

पल्ला झाड़ते नजर आए अधिकारी

कम से कम दो डॉ, चार नर्स व तीन वार्ड बॉय के साथ एक विशेषज्ञ डॉ मिल हो तो जिले में हो रही मौत के आंकड़े पर काफी हद तक ब्रेक लगाया जा सकता है। वहीं, जब इस मामले में डीएम से बात की तो उन्होंने बताया कि वेंटिलेटर मौजूद हैं के अनुसार सीएमओ से बात की जाएगी। मतलब साफ है कि पूरे मामले में आलाधिकारी सिर्फ पल्ला झाड़ते नज़र आ रहे हैं।

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