Home States UP: शवों को जलाने के लिये हुई लकड़ी की किल्लत, श्मशान में दाह संस्कार पर संकट
UP: शवों को जलाने के लिये हुई लकड़ी की किल्लत, श्मशान में दाह संस्कार पर संकट

UP: शवों को जलाने के लिये हुई लकड़ी की किल्लत, श्मशान में दाह संस्कार पर संकट

by Sneha Shukla

<पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> रायबरेली: कोरोना के बढ़ते प्रकोप में सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली का हाल भी लखनऊ जैसा हो गया है। शमशान घाटों पर शवों की वेटिंग चल रही है। शव जलाने के लिए लकड़ी की भारी किल्लत हो गई है। फतेहपुर जिले से लकड़ियां मंगाई जा रही हैं। ऐसा नहीं है, बल्कि शव दाह के लिए आम की जगह यूकेलिप्टस व चिलवाल की लकड़ियों से काम चल रहा है। ये लकड़ियों के रेट भी आसाराम छूने वाले हैं। बाजार में यूकेलिप्टस व चिलवाल की लकड़ियों एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल है।

शस का आकड़ा 100 तक पहुंचा

दरअसल, रायबरेली जिले में & nbsp; सबसे अधिक शव डलमऊ श्मशान घाट पहुंच रहे हैं। किसी दिन 40 या फिर 50 और किसी दिन यह आंकड़ा 100 तक पहुंच सकता है। ऊंचाहार क्षेत्र के गोकना शमशान घाट पर 15 से 20 और सरेनी के गेगासो शमशान घाट पर 20 से 25 शतों को हर दिन अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया जाता है। हर दिन यह आंकड़ा कम होने के बजाय उठता रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि, कोरोना के बाद शमशान घाट पर शवों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। आम की लकड़ी मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में चिलवाल, यूकेलिप्टस की लकड़ी की व्यवस्था किए जा रही है। बाहर से लकड़ी मंगाने पर स्थानीय पुलिस परेशान करती है। इससे और समस्या आ रही है। यही हाल है तो शस का अंतिम संस्कार भी नहीं मिला। लोगों को अपने के शवों को भू-समाधि देनी पड़ेगी।

खत्म हो गया है आम की लकड़ियां

लकड़ी व्यवसायी व गंगा घाट के सोनू पंडा का कहना है कि, जिस तरह से लगातार शव आ रहे हैं, उनके दाह संस्कार के लिए लकड़ियां कम पड़ने लगी हैं। स्थिति यहां तक ​​पहुंच गई है कि आम की लकड़ियां लगभग समाप्त हो गई हैं। चिलवाल व यूकेलिप्टस की लकड़ियों से शवों को जलाया जा रहा है। वहाँ मृतकों के परिजनों में जबरदस्त भय देखने को मिल रहा है। चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है।

शव का अंतिम संस्कार चंदन की लकड़ी से किया जाना सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन चंदन की लकड़ी जुटा पाना मुश्किल हो जाती है, इसलिए आम की लकड़ी से भी शव का अंतिम संस्कार करना अच्छा माना जाता है। क्योंकि आम को अमृत फल कहा जाता है, उसकी लकड़ी शुद्ध मानी जाती है। आम की लकड़ी से भी अंतिम संस्कार करने पर चंदन की लकड़ी के कुछ अवशेष रखे जाते हैं। चिलवाल और यूकेलिप्टस की लकड़ी से शवों का अंतिम संस्कार सही नहीं माना जाता है।

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