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शताब्दी एक्सप्रेस

अमर उजाला एक्सक्लूसिव : जांच में खुलासा, जलती हुई सिगरेट से लगी थी देहरादून शताब्दी में आग

by Sneha Shukla

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शताब्दी एक्सप्रेस
– फोटो: अमर उजाला

ख़बर सुनकर

नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के सी -5 कोच में आग लगने की वजह जलती हुई सिगरेट थी, जिसे एक यात्री ने ट्रेन के शौचालय के कूड़ेदान में डाला था। वहाँ से आग फैल गई। उत्तर रेलवे के जोनल मुख्यालय यानी बड़ौदा हाउस के अधिकारियों ने अपनी जांच पूरी कर ली है। ट्रेन के यात्रियों, टीटीई स्टाफ, गार्ड के बयानों और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से सिगरेट से आग लगने की पुष्टि हुई है।

नई दिल्ली से देहरादून जा रही शताब्दी एक्सप्रेस (02017) में रायवाला और कांसरो के बीच 13 मार्च को यह हादसा हुआ था। इसके बाद रेल महकमे में अफ़रा-तफ़री का माहौल था। जोनल मुख्यालय के चार वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जांच पूरी की है। इसमें सीआरएसई कोचिंग शैलेंद्र सिंह, सीईएसई वीणा सिन्हा, सीओपीएम-जी नीरज सहायता और सीएससी आरपीएफ पंकज गंगवार शामिल हैं।

आग ट्रेन के सी -5 कोच में लगी थी, इसके बराबर वाले कोच यानी सी -4 की सीसीटीवी फुटेज चेक की गई तो उसमें एक यात्री शौचालय जाता हुआ दिख रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यात्री 11.58 बजे शौचालय में जाने के बाद 12.05 बजे बाहर आ गया। इसके बाद जब तक 12.11 बजे ट्रेन के कोच में आग लग गई। जले हुए कोच की फारेंसिक जांच में भी कूड़ेदान से आग लगने के साक्ष्य मिले हैं। इसके बाद मुख्यालय की टीम ने इसे प्रमाणित करने के लिए कूडे’दान में सिगरेट फेंक कर जांच भी की जोकि सही साबित हुई।

अधिकारियों का मानना ​​है कि कोविड अवधि में कोच सैनिटरीज़ किए जा रहे हैं। इससे भी आग को फैलाने में सहायता मिली। गौरतलब है कि स्टार्ट में कोच के एसी में शार्ट सर्किट को आग की वजह माना जा रहा था लेकिन बड़ौदा हाउस से आई जांच रिपोर्ट ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। हालांकि सीसीटीवी फुटेज में जो यात्री शौचालय जाते हुए दिख रहे हैं उनकी पहचान नहीं पाई गई है।

ट्रेनों में धातु के कूडे’दान रखने और फायर डिटेक्शन लगाने के निर्देश
वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने जांच पूरी करने के बाद सभी रेल मंडलों को निर्देश भी दिए हैं। कहा गया है कि सभी ट्रेनों के कोच में रखे जाने वाले कूड़ेदान धातु के बने होने से ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। साथ ही सभी कोचों में नेवेटिक फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाए जाने चाहिए। इससे आग पर समय रहते काबू पाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा टीम ने रायवाला के स्टेशन अधीक्षक, ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड के कार्य की सराहना की है। में उसने यात्रियों को दूसरे कोच में शिफ्ट किया और जिस कोच में आग लगी थी उसे ट्रेन से अलग कर दिया। इसके लिए रायवाला स्टेशन अधीक्षक और शताब्दी एक्सप्रेस के गार्ड को जीएम आशुतोष गंगल सम्मानित भी कर चुके हैं।

13 मार्च को ट्रेन नंबर 02017 नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के सी -5 कोच में आग लगी थी। यह घटना रायवाला और कांसरो के बीच वन क्षेत्र में हुई। उत्तर रेलवे के जोनल मुख्यालय की टीम ने इसकी जांच पूरी कर ली है और ट्रेन में सिगरेट की चिंगारी से आग लगने की पुष्टि हुई।
– रेखा शर्मा, सीनियर एसडीएम

विस्तार

नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के सी -5 कोच में आग लगने की वजह जलती हुई सिगरेट थी, जिसे एक यात्री ने ट्रेन के शौचालय के कूड़ेदान में डाला था। वहाँ से आग फैल गई। उत्तर रेलवे के जोनल मुख्यालय यानी बड़ौदा हाउस के अधिकारियों ने अपनी जांच पूरी कर ली है। ट्रेन के यात्रियों, टीटीई स्टाफ, गार्ड के बयानों और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से सिगरेट से आग लगने की पुष्टि हुई है।

नई दिल्ली से देहरादून जा रही शताब्दी एक्सप्रेस (02017) में रायवाला और कांसरो के बीच 13 मार्च को यह हादसा हुआ था। इसके बाद रेल महकमे में अफ़रा-तफ़री का माहौल था। जोनल मुख्यालय के चार वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जांच पूरी की है। इसमें सीआरएसई कोचिंग शैलेंद्र सिंह, सीईएसई वीणा सिन्हा, सीओपीएम-जी नीरज सहायता और सीएससी आरपीएफ पंकज गंगवार शामिल हैं।

आग ट्रेन के सी -5 कोच में लगी थी, इसके बराबर वाले कोच यानी सी -4 की सीसीटीवी फुटेज चेक की गई तो उसमें एक यात्री शौचालय जाता हुआ दिख रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यात्री 11.58 बजे शौचालय में जाने के बाद 12.05 बजे बाहर आ गया। इसके बाद जब तक 12.11 बजे ट्रेन के कोच में आग लग गई। जले हुए कोच की फारेंसिक जांच में भी कूड़ेदान से आग लगने के साक्ष्य मिले हैं। इसके बाद मुख्यालय की टीम ने इसे प्रमाणित करने के लिए कूडे’दान में सिगरेट फेंक कर जांच भी की जोकि सही साबित हुई।

अधिकारियों का मानना ​​है कि कोविड अवधि में कोच सैनिटरीज़ किए जा रहे हैं। इससे भी आग को फैलाने में सहायता मिली। गौरतलब है कि स्टार्ट में कोच के एसी में शार्ट सर्किट को आग की वजह माना जा रहा था लेकिन बड़ौदा हाउस से आई जांच रिपोर्ट ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। हालांकि सीसीटीवी फुटेज में जो यात्री शौचालय जाते हुए दिख रहे हैं उनकी पहचान नहीं पाई गई है।

ट्रेनों में धातु के कूडे’दान रखने और फायर डिटेक्शन लगाने के निर्देश

वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने जांच पूरी करने के बाद सभी रेल मंडलों को निर्देश भी दिए हैं। कहा गया है कि सभी ट्रेनों के कोच में रखे जाने वाले कूड़ेदान धातु के बने होने के कारण ऐसी घटनाएं फिर से होनी चाहिए। साथ ही सभी कोचों में नेवेटिक फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाए जाने चाहिए। इससे आग पर समय रहते काबू पाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा टीम ने रायवाला के स्टेशन अधीक्षक, ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड के कार्य की सराहना की है। में उसने यात्रियों को दूसरे कोच में शिफ्ट किया और जिस कोच में आग लगी थी उसे ट्रेन से अलग कर दिया। इसके लिए रायवाला स्टेशन अधीक्षक और शताब्दी एक्सप्रेस के गार्ड को जीएम आशुतोष गंगल सम्मानित भी कर चुके हैं।

13 मार्च को ट्रेन नंबर 02017 नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के सी -5 कोच में आग लगी थी। यह घटना रायवाला और कांसरो के बीच वन क्षेत्र में हुई। उत्तर रेलवे के जोनल मुख्यालय की टीम ने इसकी जांच पूरी कर ली है और ट्रेन में सिगरेट की चिंगारी से आग लगने की पुष्टि हुई है।

– रेखा शर्मा, सीनियर एसडीएम



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