अमर उजाला ब्यूरो / एजेंसी, नई दिल्ली
द्वारा प्रकाशित: देव कश्यप
अपडेटेड शुक्र, 30 अप्रैल 2021 04:41 पूर्वाह्न IST
ख़बर सुनना
विस्तार
भारी आलोचना होने पर बृहस्पतिवार को फेसबुक ने सफाई दी कि उसने सरकार के कहने पर इन खोजों को ब्लॉक नहीं किया था। खास बात यह है कि फेसबुक पहला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं है, जिसने सरकार की आलोचना करने पर अपने यूजर्स की पोस्ट सेंसर करने की धमकी दी है। इससे पहले, सरकार के निर्देश पर सैटेलाइट ने कोरोना से जुड़ी भ्रामक पोस्ट हटाई थी। इस बार फेसबुक ने बयान में बताया कि उसने गलती से # रिजाइनमोदी को ब्लॉक किया था।
फेसबुक यूजर्स के अनुसार, बुधवार को इस हैशटैग वाली पोस्ट को सर्च करने पर कई घंटे तक उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यूजर्स को संदेश दिखाई दिया कि यह हैशटैग और इसके संबंधितित कंटेंट फेसबुक के कम्युनिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ है, इसलिए इसे ब्लॉक किया गया है।
ब्लॉक प्रक्रिया मिड एआई, मिड मैन कंट्रोल
फेसबुक ने पहले भी इस प्रकार से पोस्ट किया, कंटेंट बिना किसी कारण बताए किए गए हैं। बाधित करने की यह प्रक्रिया मध्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित है और उसके स्टाफ द्वारा नियंत्रित की जाती है।
सरकार ने कहा, हमने ब्लॉक नहीं किया
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने कहा कि उसने फेसबुक को यह हैशटैग वाले पोस्ट हटाने के लिए कोई आदेश नहीं दिए थे। अपने ट्वीट में मंत्रालय ने मीडिया और सभी नागरिकों से निवेदन भी किया कि इस अतिरिक्त संकट के समय अभी महामारी का मिलकर मुकाबला करें।
इंटरनेट ने तब सांसद-विधायकों के भी हटा दिए थे
सरकार के आदेश के बाद सैटेलाइट ने जिन पोस्ट को अपने प्लेटफॉर्म से बचाया सांसदों, विधायकों और फिल्म निर्माताओं के भी कई पोस्ट थे। एक ऑफ़लाइन डेटाबेस शोध एजेंसी लुमेन के अनुसार, लगभग 50 पोस्ट हटाए गए। सरकार ने कहा था कि ये पोस्ट पुराने, गैरसंदर्भित और भ्रामक सूचनाएं थीं।
।
