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डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
द्वारा प्रकाशित: देव कश्यप
अपडेटेड सन, 04 अप्रैल 2021 03:50 AM IST
सार
भारतीय किसान यूनियन (असली, अराजनैतिक) के नेतृत्व में ये बाइक रैली सुबह उत्तर प्रदेश के संभल से शुरू होगी जो गोजपुर बॉर्डर स्थित धरना स्थल पर आकर खत्म होगी।
किसानों का प्रदर्शन (फाइल फोटो)
– फोटो: एएनआई
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विस्तार
बाइक रैली के अगुवा और भारतीय किसान यूनियन (असली, अराजनैतिक) के अध्यक्ष हरपाल सिंह बिलारी ने उमर उजाला से कहा, सुबह इस बाइक रैली की अगुवाई मैं संभल से करुंगा। इसके आलवा अलग-अलग स्थानों से भी ये बाइक रैली शुरू होगी। बाइक रैली गजरौला, हापुड़ और ढासना होते हुए गाजीपुर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचचेंगी। यहाँ पर सभी किसान नेताओं का भाषण होगा। इसके बाद बाइक रैली का समापन होगा।
बिलारी आगे बताते हैं कि, इस दौरान लगभग 500 से 700 बाइक इस रैली में शामिल होंगी। सभी से चुंबक पहननेकर, शांतिपूर्वक और अनुशासन में बाइक चलाने की अपील की है। इसके अलावा सभी किसानों से भी कहा कि हमें कोई भी ऐसा काम नहीं करना है जिससे आम लोगों को कोई परेशानी न हो। जहां तक रास्ता जाम का सवाल है तो बाइक से कोई भी रास्ता जाम नहीं होता है। रविवार को दिन आमतौर पर रास्ते में यूं ही खाली होते हैं। हमारा उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है, हमारा हक मांगना है।
उन्होंने आगे कहा, आज केंद्र सरकार बौखला गई है। बौखलाहट में किसान मोर्चा के नेताओं पर हमला कर रहा है। सरकार के प्रक्षेपण से किसान डरने वाला नहीं है। हमला करने वालों को उचित जवाब भी दिया जाएगा। केंद्र में बैठी ये सरकार किसान विरोधी है। आज किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा है। आय दोगुना करने का दावा करने वाली सरकार आए दिन उर्वरक के दामों में वृद्धि कर रही है, जो किसानों के हित में नहीं है। कृषि कानून के विरोध में धरना चल रहा है। जब किसानों को कानून मंजूर नहीं है तो वह वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है। सरकार किसानों को पूंजीपतियों के हाथों में बेचने का कार्य कर रही है। लेकिन किसान अपनी मांग पूरी तरह नहीं होने तक आंदोलन करेंगे।
बिलारी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन ओर तेज किया जाएगा। यदि सरकार अन्नर की बात नहीं मानेगी तो उसे भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। तीनों कृषि कानूनों की वापसी किसानों के सम्मान की लड़ाई है। इसलिए यह लड़ाई जीतना है। यह लड़ाई हमने जीत ली तो 100 साल तक कोई भी सरकार किसानों के खिलाफ कानून बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगी।
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