Home LifestyleHealth कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच लोग मानसिक तनाव झेलने को मजबूर, टेली मनोरोग परामर्श में 20 फीसद की वृद्धि
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच लोग मानसिक तनाव झेलने को मजबूर, टेली मनोरोग परामर्श में 20 फीसद की वृद्धि

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच लोग मानसिक तनाव झेलने को मजबूर, टेली मनोरोग परामर्श में 20 फीसद की वृद्धि

by Sneha Shukla

कोरोनावायरस की दूसरी लहर ज्यादा घातक साबित हो रही है। ये ज्यादा लोगों को सहज कर रही है और ज्यादा जीवन को लील रही है। आर्थिक और शारीरिक समस्याओं की वजह बनने के अलावा, उन्होंने लोगों को मानसिक रूप से भी प्रभावित किया है। महामारी ने उनके दिमाग में खौफ पैदा कर दिया है। अपने वर्तमान और भविष्य के बारे में अनिश्चितता, घर पर रहने के सरकारी आदेश ने मिलकर मानसिक बीमारी को और बिगाड़ दिया है।

कोरोना की दूसरी लहर में बढ़ाई मानसिक सेहत की समस्या है

विशेषज्ञों के मुताबिक घर पर बंद होने का एहसास, अपने परिचितों से दूर, सामाजिक समर्थन से महरूम और नए वेरिएंट्स का डर मानसिक बीमारी को बढ़ा रहा है। फोर्टिस हेल्थकेयर से जुड़े डॉ। समीर पारेख कहते हैं, “मौजूदा हालात वर्तमान और भविष्य की अनिश्चितता, परिजनों के शारीरिक स्वास्थ्य, कार्य और उत्पादकता को प्रभावित कर रहे हैं।” हालांकि वर्तमान परिस्थिति उनकी उम्र, लिंग या अन्य खेल के बावजूद हर किसी को प्रभावित कर रही है। उसके नेतृत्व में सोवियत और वयस्क मानसिक सेहत की समस्याओं के लिए मदद तलाश करने तक पहुंच रहे हैं। लोगों की सबसे प्रमुख समस्या चिंता और डिप्रेशन है। बच्चे अपने भविष्य के मंसूबों को लेकर ज्यादा तनावग्रस्त हैं, जिसके नतीजे में अस्तित्व संबंधी संकट पैदा हो गया है। व्यस्क वित्तीय सुरक्षा और नौकरी की सुरक्षा के डर से दब गए हैं। ये खौफ को कोविड की चिंता या महामारी की चिंता से जोड़ा जा सकता है।

अप्रैल के प्रारंभ से टेली साइकोल परामर्श में 20 फीसद की वृद्धि

मनिपाल हॉस्पटल बेंगलुरू में डॉ। सतीश कुमार का कहना है कि अप्रैल की शुरुआत से टेली साइकोल परामर्श में कम से कम 20 फीसद की वृद्धि हो गई है। लोगों को डर है कि उनकी जिंदगी खत्म होने जारी है, जिससे उनकी मौत की चिंता के मुद्दे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोग स्प्रेडर होने और अपने परिजनों को नुकसान पहुंचाने की वजन बनने के बारे में भी चिंतित हैं। अब ये मेडिकल सहायता के लिए पहुंच रहे हैं क्योंकि उन्हें बहुत ज्यादा भावनात्मक मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।” कुमार के मुताबिक, स्थिति से निपटने का एकमात्र तरीका आशावादी दृष्टिकोण रखना और मंत्र को दबानेाना है कि ‘ये भी जल्द ही गुजर जाएगा।’

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