<पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> नई दिल्ली: strong> को विभाजित -19 की इस जंग में ब्रिटेन भारत के साथ है। भारत की जरूरत के लिहाज से महत्वपूर्ण 600 उपकरण व संसाधन भेजे जा रहे हैं। दो भारत में पहुंच चुके हैं और कुछ अन्य जल्द ही भारत आने वाले हैं। साथ ही ब्रिटेन ने भारत के लिए तीन मिनी ऑक्सीजन प्लांट भेजने का भी ऐलान किया है। ब्रिटेन के हाई कमिश्नर ने कहा कि मैं उस वक्त लंदन में था जब हमारे यहाँ पर को विभाजित -19 ली बड़ी वेव आई थी। वह हमारे अनुभव के लिए बहुत मुश्किल था। लेकिन स्थिति को संभालना संभव & nbsp; है। आइसोलेशन और वैक्सीनेशन जैसे उपाय भारत सरकार भी कर रही है। इस तरह की स्थिति में जरूरी है कि हम वह करें जो विज्ञान हमें बताता है। जनता को सरकार द्वारा दी गई सलाह पर चलना चाहिए। p>
उन्होंने कहा कि हम इस मुसीबत से गुजरे हैं। पिछली बार भारत ने हमारी मदद की थी। प्रिंस चार्ल्स ने अपने बयान में कहा कि भारत ने ड्रग्स के क्षेत्र में बड़ी मदद की है। ऐसे में यूके भी भारत की मदद करेगा। क्योंकि कहा भी जाता है वसुधैव कुटुंबकम यह दुनिया एक है। p>
एलेक्स इलीस ने कहा कि भारत और यूके के बीच में वैक्सीन सहयोग का एक नमूना कोविशील्ड है। यह ब्रिटिश सरकार द्वारा वित्त पोषित ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्रोजन का के कमर्शिलिज़ेशन से बना है जिसका सबसे बड़ा उत्पादन भारत में हो रहा है। हम इस बारे में भारत सरकार के साथ संपर्क में है। भारत को इस समय वैक्सीन की जरूरत है और को भी शील्ड का सबसे ज्यादा उत्पादन सिरम इंस्टीट्यूट ही करता है। p>
उन्होंने कहा कि यूके भारत का दूसरा सबसे बड़ा वैज्ञानिक साझीदार है और यूरोप में सबसे बड़ा। यूके की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा एनएचएस में सबसे ज्यादा अगर किसी देश के लोग हैं तो वह भारत है। p>
ब्रिटेन के उच्चायुक्त ने कहा कि तात्कालिक संकट में भारत की मदद करने के लिए यूके ने मदद पहुंचाई है। साथ ही कई अन्य क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें जिओमिक्स शामिल है। दोनों देश इस बीमारी से लड़ाई के बारे में भी अपने अनुभव और वैज्ञानिक डेटा शेयर कर सकते हैं। नए वेरिएंट्स को मिलकर स्टडी कर सकते हैं। इस बीमारी के इलाज को लेकर अपने अनुभवों को भी दोनों देश साझा कर सकते हैं। दोनों ही मूर्खों के पास काफी अनुभव है। यह निश्चित रूप से एक विषय होगा जब जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके के प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉनसन के बीच शहर में बातचीत होगी। p>
उन्होंने कहा कि भारत और यूके के बीच में जल्द ही यानी कुछ हफ्तों के भीतर दोनों प्रमुखों की बातचीत होनी चाहिए। मैं आपको एग्जैक्ट की तारीख बताऊं, लेकिन यह जल्द ही होगा। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भारत आने के लिए और भारत के साथ संवाद के लिए आतुर है। वह पहले भी भारत आ चुके हैं भारत को अच्छे से जानते हैं। लेकिन यह स्क्रिप्ट के लिए एक कठिन वर्ष है। p>
उच्चायुक्त इलीस ने कहा कि हमने भारत को सहायता सामग्री भेजी है। कुछ और भी घोषणाएं हुई हैं। सारा फोकस इस चीज को लेकर है कि आखिर भारत को किन चीजों की जरूरत है। इस बारे में हम भारत सरकार के साथ भी संपर्क में हैं और अपने प्रयासों को तालमेल के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। ब्रिटेन की कई कंपनियां भी ऑक्सीजन उत्पादन में भारत की मदद करने को आगे आई हैं। साथी यूके में मौजूद भारतीय डायस्पोरा के लोग जो काफी सक्रिय हैं वह भी मदद के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा ब्रिटेन के आमजन भी भारत की मदद के लिए योगदान दे रहे हैं। आपने प्रिंस चार्ल्स की तरफ से भारत की मदद के लिए शुरू किए गए प्रयास को देखा होगा। लगभग 10 साल पहले शुरू किए गए उनके संगठन ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट की तरफ से की जा रही कोशिशों को लोगों का समर्थन मिल रहा है और लगभग 2-3 करोड़ इसमें जमा हो चुके हैं। अब तक काफी योगदान किया जा चुका है। p>
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