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घाटे का सौदा: भारत से कपास आयात के यू-टर्न पर पाकिस्तान में नाराजगी

by Sneha Shukla

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एजेंसी, इस्लामाबाद

द्वारा प्रकाशित: अमित मंडल
Updated Sat, 03 अप्रैल 2021 01:02 AM IST

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पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कपास के आयात की अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर पाकिस्तानी कपड़ा क्षेत्र में कचरा है। वह सरकार से इस बात को लेकर नाराज है कि उसने भारत से कपास न खरीदकर देश के कपड़ा निर्यात को सबसे बड़ी श्रेणियों तक पहुँचाने की कोशिश की।]पाकिस्तानी टेक्सटाइल उद्योग ने इस यूटर्न का विरोध करना शुरू कर दिया है।

बता दें कि पाकिस्तान में वर्तमान में अमेरिका, जेसन और उज्बेकिस्तान से कपास उत्पादन हो रहा है जो न सिर्फ एक्सपायर है बल्कि उसे पाक होने तक पहुंचने में दो महीने तक लग जाते हैं। जबकि भारत से वह कपास कम दामों पर महज दो से तीन दिन में पहुंच जाता है। पाकिस्तानी पत्र डॉन ने पाक कपड़ा मंच के अध्यक्ष जावेद बिलवानी के हवाले से लिखा है कि आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) के प्रस्ताव को पाक कैलकुलेटर द्वारा खारिज कर देना विदेशी खरीददारों को भी नकारात्मक संदेश देगा क्योंकि पूरे देश में सूती धागा उपलब्ध नहीं है। बता दें कि ईसीसी ने भारत से चीनी, कपास और सूती कपड़े के आयात को दोबारा की मंजूरी दी थी। बुधवार को पाक वित्त मंत्री ने इस बाबत की घोषणा भी की लेकिन अगले ही दिन इस पर यूटर्न ले लिया गया। पाक टेक्सटाइल उद्योग ने इस यूटर्न को देश के लिए भारी दबाव का निर्णय साबित होने के बारे में बताया।

भारत से आरंभ की आवश्यकता
पाकिस्तान एप्रेल फॉर के चेयरमैन जावेद बिलवानी ने कहा कि इमरान सरकार का यूटर्न पाकिस्तानी कपड़ा उद्योग के लिए खतरनाक साबित होगा क्योंकि भारत से कपास की पाक पाक के व्यापक हित में है। उन्होंने सरकार के वर्ष के मंत्रालय के सलाहकार अब्दुल रज्जाक दाउद के उस फैसले का भी स्वागत किया जिसमें कहा गया है कि भारत से कपास की दुकान की मूल जरूरत है।

भारत से आयात का प्रस्ताव जारी
पाकिस्तान का कपड़ा निर्यात क्षेत्र लगातार ड्यूटी फ्री कपास की मांग कर रहा है और ड्यूटी फ्री कपास पाकिस्तान को भारत से ही सस्ता मिल सकता है। किसी और देश से इसे खरीदने पर उसे पाकिस्तान तक लाने की लागत ही इतनी बढ़ जाती है, कि वह निवेश का सौदा साबित होने लगता है। लिहाजा, पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग इस यूटर्न के बाद सरकार पर लगातार भारत से कपास आयात का दबाव बना रहा है।

सूती मुद्रा की उपलब्धता तय करे सरकार
पाकिस्तानी कपड़ा उद्योग ने सरकार से कहा है कि वह देश में सूती उद्योगों की उपलब्धता सुनिश्चित करे क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश का कपड़ा निर्यात औंधे मुंह गिर जाएगा। मौजूदा साल में देश को कपास उत्पादन में 40 प्रतिशत की कमी का सामना करना पड़ा और अगर 2014-2015 में इसकी तुलना 15 मिलियन गांठ के साथ की गई, तो इस साल इसमें 50 प्रतिशत की गिरावट आई।

विस्तार

पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कपास के आयात की अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर पाकिस्तानी कपड़ा क्षेत्र में कचरा है। वह सरकार से इस बात को लेकर नाराज है कि उसने भारत से कपास न खरीदकर देश के कपड़ा निर्यात को सबसे बड़ी श्रेणियों तक पहुँचाने की कोशिश की। पाकिस्तानी टेक्सटाइल उद्योग ने इस यूटर्न का विरोध करना शुरू कर दिया है।

बता दें कि पाकिस्तान में वर्तमान में अमेरिका, जेसन और उज्बेकिस्तान से कपास उत्पादन हो रहा है जो न सिर्फ एक्सपायर है बल्कि उसे पाक होने तक पहुंचने में दो महीने तक लग जाते हैं। जबकि भारत से वह कपास कम दामों पर महज दो से तीन दिन में पहुंच जाता है। पाकिस्तानी पत्र डॉन ने पाक कपड़ा मंच के अध्यक्ष जावेद बिलवानी के हवाले से लिखा है कि आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) के प्रस्ताव को पाक कैलकुलेटर द्वारा खारिज कर देना विदेशी खरीददारों को भी नकारात्मक संदेश देगा क्योंकि पूरे देश में सूती धागा उपलब्ध नहीं है। बता दें कि ईसीसी ने भारत से चीनी, कपास और सूती कपड़े के आयात को दोबारा की मंजूरी दी थी। बुधवार को पाक वित्त मंत्री ने इस बाबत की घोषणा भी की लेकिन अगले ही दिन इस पर यूटर्न ले लिया गया। पाक टेक्सटाइल उद्योग ने इस यूटर्न को देश के लिए भारी दबाव का निर्णय साबित होने के बारे में बताया।

भारत से आरंभ की आवश्यकता

पाकिस्तान एप्रेल फॉर के चेयरमैन जावेद बिलवानी ने कहा कि इमरान सरकार का यूटर्न पाकिस्तानी कपड़ा उद्योग के लिए खतरनाक साबित होगा क्योंकि भारत से कपास की पाक पाक के व्यापक हित में है। उन्होंने सरकार के वर्ष के मंत्रालय के सलाहकार अब्दुल रज्जाक दाउद के उस फैसले का भी स्वागत किया जिसमें कहा गया है कि भारत से कपास्टी कब की मूल जरूरत है।

भारत से आयात का प्रस्ताव जारी

पाकिस्तान का कपड़ा निर्यात क्षेत्र लगातार ड्यूटी फ्री कपास की मांग कर रहा है और ड्यूटी फ्री कपास पाकिस्तान को भारत से ही सस्ता मिल सकता है। किसी और देश से इसे खरीदने पर उसे पाकिस्तान तक लाने की लागत ही इतनी बढ़ जाती है, कि वह निवेश का सौदा साबित होने लगता है। लिहाजा, पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग इस यूटर्न के बाद सरकार पर लगातार भारत से कपास आयात का दबाव बना रहा है।

सूती मुद्रा की उपलब्धता तय करे सरकार

पाकिस्तानी कपड़ा उद्योग ने सरकार से कहा है कि वह देश में सूती उद्योगों की उपलब्धता सुनिश्चित करे क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश का कपड़ा निर्यात औंधे मुंह गिर जाएगा। मौजूदा साल में देश को कपास उत्पादन में 40 प्रतिशत की कमी का सामना करना पड़ा और अगर 2014-2015 में इसकी तुलना 15 मिलियन गांठ के साथ की गई, तो इस साल इसमें 50 प्रतिशत की गिरावट आई।

भारत से कपास के आयात पर पाकिस्तानी उद्योगपति नाराज



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