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ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएन्सी (एचआईवी) की वैक्सीन को पिछले तीन दशकों से खोज जारी है। ऐसा ही लगता है कि जल्द ही वैक्सीन को ईजात करने में सफलता मिल जाएगी। इस संभावना के साथ ही वैज्ञानिक समुदाय और कोरोना संक्रमण से जूझ रही दुनिया के लिए थोड़ी राहत की खबर है।
वर्तमान में पूरी दुनिया को विभाजित -19 महामारी त्रस्त है और अफ्रीका में तो इबोला भी दहशत का सबब बना हुआ है। ऐसे में एचआईवी की वैक्सीन को लेकर आ रही है। गौरतलब है कि वैश्विक रूप से, 2019 में 38 मिलियन लोग एचआईवी / एड्स से पीड़ित थे।
फरवरी में एचआईवी वैक्सीन की खोज में सफलता की घोषणा की गई थी।
फरवरी में, नॉन प्रोफिट ड्रग डेवलपर IAVI और स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट ने इस सफलता की घोषणा की थी, हालांकि इस खबर पर ध्यान उस समय गया जब यह वेब पर वायरल हुआ। बता दें कि न्यू एप्रोच कोविड -19- mRNA वैक्सीनेशन के खिलाफ मॉडर्न की वैक्सीन (साथ ही फाइजर-बायोएनटेक के) जैसी अंडरलाइन वैक्सीन टेक्नॉलजी पर बेस्ड है। इस वैक्सीन ने इम्यून सेल्स के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में सफलता दिखाई जो की-उत्पादन शुरू करने के लिए जरूरी हैं। ये न्यू एप्रोच जिसे “जर्मलाइन टारगेटिंग” कहा जाता है, वह स्पेसिफिक एजाज के साथ बी-सेल्स को सक्रिय करता है।
प्रारंभिक चरण में सफलता है
इस क्रिया का फेज 1 ट्रायल में 48 में से 47 प्रतिभागियों में पता चला था। जबकि शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह प्रारंभिक डेटा हैं, और परीक्षण पूर्व चरण में है। इसी तरह यह सफलता मुक्त विश्व की उम्मीद को बल दे रही है।
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