<पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> देश में आए कोरोना संकट के बीच थलसेना प्रमुख जनरल एम। एम नरवने दो दिन के लद्दाख दौरे पर गए हैं। मंगलावर को सेना प्रमुख ने पूर्वी लद्दाख में तैनात सैनिकों से मुलाकात की औरसंदरों से चीन से स.टी."पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> आपको बता दें कि पिछले साल इन दिनों के दौरान कोरोना महामारी के जब ही चीन ने पूर्वी लद्दाख से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई जगह टाइपिंग की कोशिश की थी जिसके बाद दोनों देशों में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे। p> <पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> नरवने ने सैनिकों का तैनात रहने के लिए उनकी दृढ़ता और उच्च-मनोबल की सराहना की strong> p>
सेना ने मंगलवार को बयान जारी करते हुए बताया कि थलसेना प्रमुख जनरल नरवने ने पूर्वी लद्दाख और सियाचिन का दौरा किया। अपने दौरे के दौरान सेना के अध्यक्ष ने वहां तैनात सैनिकों से मुलाकात कर बेहद उंचाई वाले इलाकों में विपरीत मौसम और मौसम में भी तैनात रहने के लिए सैनिकों की दृढ़ता और उच्च-मनोबल की सराहना की। p>
गौरतलब है कि सियाचिन और पूर्वी लद्दाख दुनिया के सबसे उंचाई रण-क्षेत्र में से एक हैं और वहां ऑक्सीजन की बेहद कमी रहती है। इस दौरे में सेना प्रमुख के साथ उत्तरी कमान के सैंडर, लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी और लेह स्थित 14 वीं कोर (फायर एंड फ्यूरी कोर) के सैंडर, लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन भी मौजूद थे। p>
दोनों क्षेत्रों की रक्षा-सुरक्षा की जिम्मेदारी 14 वीं कोर की है strong> p>
सेना के मुताबिक, इस दौरान 14 वीं कोर के रणदर लेफ्टिनेंट जनरल मेनन ने सेनाध्यक्ष को पूर्वी लद्दाख और सिचायिन में मौजूदा सुरक्षा-परिदृश्य और सैद्धांतिकेशनल-तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इन दोनों क्षेत्रों की रक्षा-सुरक्षा की जिम्मेदारी 14 वीं कोर की है। & nbsp; p>
बुधवार को भी थलसेना प्रमुख पूर्वी लद्दाख में ही मौजूद रहेंगे और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा का जायजा लेंगे। क्योंकि पैंगोंग-त्सो झील के उत्तर और दक्षिण में पहले चरण के डिसिंगेजमेंट के बाद चीन अब दूसरे चरण के डिसिंगेजमेंट में आर्नानी कर रहा है। दूसरे चरण का डिसिंगेजमेंट यानि सैनिकों की फॉरवर्ड-लोकेशन के पीछे हटने की बारी अब गोगरा, हॉट-स्प्रिंग और डेपसांग प्लेन जैसे इलाकों की है। ऐसे में एलएसी पर परिस्थिति अभी भी बहुत तनावपूर्ण बनी हुई हैं। p>
बीते साल दोनों देशों के सैनिकों के बीच फायरिंग और हिंसक-झड़पें भी हुईं strong> p>
पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान जब भारतीय सेना ने अपनी सभी एक्सरसाइज और पैट्रोलिंग तक बंद कर रखी थी, केवल अप्रैल महीने के आखिर और मई की शुरूआत में चीन की पीओ सेना ने एक्सरसाइज के नाम पर बड़ी तादाद, अपने सैनिक और टैंक इत्यादि की तैनाती एलएसी पर कर दी थी। हालांकि, भारतीय सेना ने भी उसके बाद अपने सैनिकों की भागीदारी की बेहद तेजी से की थी। p>
इस दौरान गलवान घाटी, पैंगोंग-त्सो और कैलाश हिल रेंज पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच फायरिंग और हिंसक-झड़पें भी हुईं। यही कारण है कि मंगलवार को थलसेना प्रमुख का पूर्वी लद्दाख का दो दिन का दौरा बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि एक बार फिर इस तरह की खबरें आ रही हैं कि चीनी सेना एलएसी पर अपने अश्वज और स्वरूपेशेस में तब्दली कर रही है। & nbsp; p>
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