आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि राजधानी को अब तक सबसे ज्यादा 555 टन ऑक्सीजन प्राप्त हुई है। वहीं, शहर के अस्पताल कोरोनाइरस के मामलों में जबर्दस्त बढ़ाने के बीच जीवन रक्षक गैस की आपूर्ति की कमी से जूझ रहे हैं।
बुधवार को ऑक्सीजन बुलेटिन जारी करते हुए चड्ढा ने कहा कि हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई है और उसकी तुलना शुतुरमुर्ग तक से कर दी। चड्ढा ने कहा कि शायद यह फटकार की वजह से, दिल्ली को 555 मिलियन टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन मिला है। यह अभी तक की सर्वाधिक आपूर्ति है, जबकि 976 मिलियन टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है।
उन्होंने दावा किया कि हालांकि, यह ऑक्सीजन नियमित स्रोतों से उपलब्ध नहीं किया गया है, बल्कि केंद्र सरकार ने इसके अन्य राज्यों से व्यवस्था कर दिल्ली को दी है जो अन्य स्थानों पर भेजी जा रही थी।
विधायक ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन की कमी और सिलेंडरों को फिर से नहीं भरा जाने को लेकर 48 एसपीएस मैसेज मिले और उनका समाधान कर दिया।
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चड्ढा ने कहा कि बरीफिंग में कहा गया है कि हमने 36.40 टन ऑक्सीजन एसो रिसर्च को हल करने के लिए भेजी है। ये अस्पताल कुल 4,036 ऑक्साजेन बेड हैं। इसका मतलब है कि हमने 4,036 जिंदगियों की मदद की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से कारण बताने को कहा कि को विभाजित -19 मरीजों के इलाज के लिए दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति पर आदेश की तामील नहीं कर पाने के लिए उसके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए। अदालत ने कहा, ” आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा सकते हैं, हम ऐसा नहीं करेंगे।
हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है, अब हाईकोर्ट भी कह रहा है कि जैसे भी केंद्र हो हर दिन दिल्ली को 700 मिलियन टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी होगी।
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