Home Breaking News दुनिया में कोरोना: कई देश ऐसे हैं जहां अभी तक शुरू ही नहीं हो पाया है टीकाकरण
सांकेतिक तस्वीर

दुनिया में कोरोना: कई देश ऐसे हैं जहां अभी तक शुरू ही नहीं हो पाया है टीकाकरण

by Sneha Shukla

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

द्वारा प्रकाशित: गौरव पाण्डेय
अपडेटेड सन, 09 मई 2021 10:02 PM IST

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि लगभग एक दर्जन देश हैं जो टीके का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर देश अफ्रीका में हैं। इस सूची में चाड के साथ बर्किना फासो, बुरुंडी, एरित्रिया और तंजानिया आदि के नाम शामिल हैं।

सांकेतिक चित्र
– फोटो: पिक्साबे

ख़बर सुनना

उत्तर-मध्य अफ्रीका में एक देश चाट है। यहाँ की राजधानी के एक छोटे से अस्पताल में काम करती हैं डॉ। ओउमाइमा जरमा यहाँ इस बात पर कोई बहस नहीं होती है कि कोरोना के खिलाफ कौन सी वैक्सीन बेहतर है। इसका कारण यह है कि यहां कोई वैक्सीन ही नहीं है। मरीजों को छोड़ दीजिए कोरोना संभावितों का इलाज करने वाले डॉक्टरों और नर्सों के लिए भी टीके नहीं हैं। चाड दुनिया के सबसे कम विकसित देशों में से एक है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉ। जरमा का कहना है, ‘मैं यह गलत और अन्यायपूर्ण मानती हूं और यह कुछ ऐसा है जो मुझे दुखी करता है। मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं है। जो भी वैक्सीन को यहां पहले अनुमति दी जाएगी मैं वह लगवाऊंगी। ‘

ऐसे समय में जब अमीर देश अपने नागरिकों के लिए टीकों का भंडारीकरण कर रहे हैं, कई गरीब देश अभी भी टीके की खराकों से वंचित हैं। चाड जैसे कुछ देशों को तो अभी तक टीका मिल ही नहीं पाया गया है।

बीते गुरुवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा था, वैक्सीन आपूर्ति में देरी और कमी के कारण अफ्रीकी देश बाकी दुनिया से और पीछे हो रहे हैं।]खोज में हुए टीकाकरण के मुकाबले इस महाद्वीप में केवल एक प्रति टीके लग पाए हैं।

वर्दीसेफ के सप्लाई नवाजन के लिए कोवाक्स समन्वयक जियान गांधी का कहना है कि ऐसी जगहों पर जहां कोई वैक्सीन नहीं है, वहां वायरस के नए और चिंताजनक वेरिएंट के पैदा होने की भी आशंका है। इसलिए हमें दुनिया में कहीं भी वैक्सीन की कमी को लेकर चिंतित होना होगा और इसका उपाय करना होगा। उन्होंने उच्च आय वाले देशों से उन देशों को टीके दान करने की अपील की जिनके अभी तक टीके नहीं मिल पाए हैं।

महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक चाड में कोरोना के कारण केवल 170 रोगियों की मौत की पुष्टि हुई है। हालाँकि, यहाँ वायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास न के बराबर हैं। राजधानी के आंतरिक हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए पिछले साल बंद कर दिया गया था। लेकिन अब परिषद और अन्य स्थानों से उड़ानें जारी होने के बाद यहां ट्रांस का खतरा बढ़ गया है।

अफ्रीकी देशों में को विभाजित के कुल पुष्ट मामलों की संख्या बाकी दुनिया के कोरोना हेलस्पॉट के मुकाबले काफी कम रही है। लेकिन, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ये आंकड़े मौलिकता से कहीं कम हैं। वैक्सीन का इंतजार कर रहे ज्यादातर अफ्रीकी देश वे हैं जहां संक्रमण को ट्रैक करने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था खस्ता हाल है।

विस्तार

उत्तर-मध्य अफ्रीका में एक देश चाट है। यहाँ की राजधानी के एक छोटे से अस्पताल में काम करती हैं डॉ। ओउमाइमा जरमा यहाँ इस बात पर कोई बहस नहीं होती है कि कोरोना के खिलाफ कौन सी वैक्सीन बेहतर है। इसका कारण यह है कि यहां कोई वैक्सीन ही नहीं है। मरीजों को छोड़ दीजिए कोरोना संभावितों का इलाज करने वाले डॉक्टरों और नर्सों के लिए भी टीके नहीं हैं। चाड दुनिया के सबसे कम विकसित देशों में से एक है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार डॉ। जरमा का कहना है, ‘मैं यह गलत और अन्यायपूर्ण मानती हूं और यह कुछ ऐसा है जो मुझे दुखी करता है। मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं है। जो भी वैक्सीन को यहां पहले अनुमति दी जाएगी मैं वह लगवाऊंगी। ‘

ऐसे समय में जब अमीर देश अपने नागरिकों के लिए टीकों का भंडारीकरण कर रहे हैं, कई गरीब देश अभी भी टीके की खराकों से वंचित हैं। चाड जैसे कुछ देशों को तो अभी तक टीका मिल ही नहीं पाया गया है।

बीते गुरुवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा था, वैक्सीन आपूर्ति में देरी और कमी के कारण अफ्रीकी देश बाकी दुनिया से और पीछे हो रहे हैं।]खोज में हुए टीकाकरण के मुकाबले इस महाद्वीप में केवल एक प्रति टीके लग पाए हैं।

वर्दीसेफ के सप्लाई नवाजन के लिए कोवाक्स समन्वयक जियान गांधी का कहना है कि ऐसी जगहों पर जहां कोई वैक्सीन नहीं है, वहां वायरस के नए और चिंताजनक वेरिएंट के पैदा होने की भी आशंका है। इसलिए हमें दुनिया में कहीं भी वैक्सीन की कमी को लेकर चिंतित होना होगा और इसका उपाय करना होगा। उन्होंने उच्च आय वाले देशों से उन देशों को टीके दान करने की अपील की जिनके अभी तक टीके नहीं मिल पाए हैं।

महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक चाड में कोरोना के कारण केवल 170 रोगियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। हालाँकि, यहाँ वायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास न के बराबर हैं। राजधानी के आंतरिक हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए पिछले साल बंद कर दिया गया था। लेकिन अब परिषद और अन्य स्थानों से उड़ानें जारी होने के बाद यहां ट्रांस का खतरा बढ़ गया है।

अफ्रीकी देशों में को विभाजित के कुल पुष्ट मामलों की संख्या बाकी दुनिया के कोरोना हेलस्पॉट के मुकाबले काफी कम रही है। लेकिन, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ये आंकड़े मौलिकता से कहीं कम हैं। वैक्सीन का इंतजार कर रहे ज्यादातर अफ्रीकी देश वे हैं जहां संक्रमण को ट्रैक करने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था खस्ता हाल है।

Related Posts

Leave a Comment