नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने बुधवार को कहा कि इसमें आश्चर्य की बात नहीं है कि चीन हिंद महासागर क्षेत्र में कदम रख रहा है क्योंकि उसके ऊर्जा स्रोत, बाजार और संसाधन पश्चिम में स्थित हैं। रायसीना डॉयलॉग में अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना हिंद-प्रशांत की सुरक्षा एवं खेल में योगदान के लिए अपनी भूमिका के लिए तैयार है। उन्होंने इस संदर्भ में वैश्विक मंच पर विश्वास से भरे देश के रूप में भारत के उभरने का जिक्र किया।
चतुष्कोणीय गठबंधन के बीच सैन्य सहयोग की संभावना के बारे में पूछे जाने पर एडमिरल सिंह ने किसी भी जवाब नहीं दिया लेकिन कहा कि ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिससे नौसेना नहीं निपट सकती है और उसकी इस गठबंधन के सदस्य देशों की नौसेनाओं के साथ मजबूत साझेदारी है। । पिछले महीने भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के इस चतुष्कोणीय गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व ने ऐसे कब में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निश्चय किया था जब चीन इस क्षेत्र में अपना सैन्य दबदबा बढाता जा रहा है।
अमेरिका की हिंद प्रशांत कमान केंदरर एडमिरल फिलिप स्कॉट डेविडसन ने कहा था कि चतुष्कोणीय गठबंधन में सुरक्षा पैनल से बाहर भी सहयोग की विपुल संभावना है। एडमिरल सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र में ज्यादातर देशों की व्यापक समृद्धि के लिए सहयोग और समन्वय की स्वदेशी इच्छा है। उन्होंने कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र के मुद्दों पर आधारित सहयोग का प्रचुर अवसर देता है। उन्होंने कहा, सहयोग, जैसा कि आप जानते हैं, से आपसी सामंजस्य बढ़ता है।
चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर
एडमिरल सिंह ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के मौके उन चुनौतियों पर भारी पड़ सकते हैं जिनका सामना किया जा रहा है। उन्होंने कहा, महासागर जोड़ते हैं, बांटते नहीं हैं। हिंद महासागर में चीन के मौजूदगी का विस्तार करने के प्रयासों पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि उसके ऊर्जा स्रोत, बाजार और संसाधन पश्चिम में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि चीन हिंद महासागर क्षेत्र में आ गया है क्योंकि यह अक्सर कहा जाता है। भारतीय नौसेना चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए हिंद महासागर में अपनी अस्तित्वगी बढ़ा रही है।
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