पश्चिम बंगाल में जहां कोरोना के अभी चार चरण के चुनाव बाकी हैं, तो वहीं राज्य में कोरोना के नए मामलों ने डराना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों पर सख्ती के बीच पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के शुक्रवार को रिकॉर्ड 6 हजार 910 नए मामले आए, जबकि 26 लोगों की इस महामारी के कारण मौत हो गई।
एक दिन पहले गुरुवार को गुरुवार को यहां पर कोरोना संक्रमण के 6 हजार 769 नए मामले आए, जबकि 22 ने दम तोड़ दिया। तो वहीं बुधवार को पश्चिम बंगाल में 5,892 लोग कोरोनावायरस से सतर्क हुए। इससे पहले मंगलवार को राज्य में 4817 और सोमवार को 4511 कोरोना के नए मामले की पुष्टि हुई थी।
कोरोनावायरस से उत्पन्न आरएसपी उम्मीदवार की हुई मौत
चार दिन पहले कोविड -19 से सतर्क हुए रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवार प्रदीप कुमार नंदी की शुक्रवार को यहां एक अस्पताल में मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 73 वर्षीय नंदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार थे, जो संक्रमण के कारण अपने घर में क्वारंटाइन थे।
हालत बिगड़ने के बाद उन्हें बृहस्पतिवार रात को बरहमपुर के एक अस्पताल ले जाया गया। अधिकारी ने बताया कि वे अन्य कई बीमार थे और शाम को लगभग छह बजे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। कोविद -19 से निकाय पाए गए शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार राहाउल हक का भी गुरुवार को कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
चुनाव आयोग ने नई दिशा निर्देश जारी किया है
बंगाल में कोरोना के मामलों में इजाफे को देखते हुए सर्वदलीय बैठक के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाकी बचे चरणों में प्रचार करने की अवधि को पूरा दिया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनावी प्रचार के समय को शाम 7 बजे तक सीमित कर दिया गया है। शाम 7 बजे से सुबह 10 बजे तक चुनाव प्रचार नहीं होगा।
इसी तरह की दौड़ के पूर्व प्रचार का शोर थमने की अवधि भी 48 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे कर दी गई है। यानी अब दौड़ के तीन दिन पहले प्रचार थम जाएगा। नए नियम बंगाल विधानसभा चुनाव के शनिवार के बाद बचने के मुकाबले के तीन चरणों में लागू होंगे। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों से कहा गया है कि वह जनता के सामने बेहतर उदाहरण पेश करें और खुद भी कोरोना गाइडलाइंस का पालन करें।
उल्लंघन करने पर राजनीतिक दलों पर सख्ती
राजनीतिक दलों के साथ राज्य के सभी धार्मिक और पुलिस के अधिकारियों को चुनाव आयोग के साफ तौर पर निर्देश है कि वह हर हालत में को विभाजित के नियमों का पालन करवाएं। अगर कोई राजनीतिक दल या कोई नेता नियमों का उल्लंघन करता है तो जिले के प्रशासन के पास ये अधिकार होगा कि वह सभा या रैली, रोड शो और कैंपेन को रद्द कर सकता है।
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