न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
द्वारा प्रकाशित: जीत कुमार
Updated Sun, 25 Apr 2021 03:03 AM IST
शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाना … (फाइल फोटो)
– फोटो: पीटीआई
ख़बर सुनकर
विस्तार
इन युवकों का नाम दानिश और सद्दाम है। दोनों ने अब तक 60 हिंदू शकों का अंतिम संस्कार किया है। खास बात यह कि दानिश और सद्दाम उन शवों का अंतिम संस्कार करते हैं, जिनके परिजन कोरोनावायरस के डर से शमशान घाट पर नहीं पहुंच पाते हैं।
खबरों की माने तो दानिश और सद्दाम दिन-रात काम कर शवों के अंतिम संस्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे भी लोग जो शव को छुने से मना कर देते हैं, तो श्मशान घाट वाले हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार करते हैं। उनका कहना है कि यह हमारा काम है हम धर्म नहीं देखते हैं और ऐसा काम आगे भी करते रहेंगे।
बता दें, कि यह कब रमजान का पाक महीना चल रहा है। दानिश और सद्दाम रोजा भी रखते हैं। वास्तव में, ऐसे बुरे समय में भाईचारे की यह सकारात्मक खबर है।
।
