कोरोना की दूसरी लहर के आते ही लोगों को जिंदा रखने के लिए ऑक्सीजन की बहुत जरूरत महसूस होने लगी है। सबसे ज्यादा डराने वाली बात तो यह थी कि महाराष्ट्र में जितनी ऑक्सीजन पैदा की जाती है उतनी ऑक्सीजन हाल में आवश्यकता के हिसाब से बहुत कम है। p>
इसी को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर ऑक्सीजन दूसरे जिलों और कई स्थानों पर दूसरे राज्यों से ऑक्सीजन मंगवाई जा रही है जिससे किसी भी मरीज को ऑक्सीजन की कमी ना हो। को ही हर मरीज की जान को बचाना संभव है। राज्य में हर सड़क पर ऑक्सीजन से भरी गाड़ियां पैदा दिखाई देती हैं और यह गाड़ियां इसी तरह अपने लक्ष्य पर सही सलामत पहुंचे इसी कारण से उसे एस्कॉर्ट करने के लिए और ग्रीन हाउस बनाने के लिए विशेष एस्कॉर्ट टीम मेयी गई है। p>
ऑक्सीजन की गाड़ियों को कुछ भी होने का है डर strong> p>
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, हमें कई स्थानों से इनपुट मिला है कि लोग काफी उग्र हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जो इस बात पर अड़े हैं कि ऑक्सीजन उनके पास पहले आ चुकी है। जिसको देखते हुए हमें यह डर है कि ऑक्सीजन की गाड़ी के साथ कुछ भी हो सकता है। जिसको ध्यान में रखते हुए यह एस्कॉर्ट टीम बनाई गई है। p>
कैसे करती है ये काम? Strong> p>
महाराष्ट्र पुलिस ने बताया कि इस काम के लिए उन लोगों ने कहा था? गांव के सरपंच, पुलिस पाटिल और लोकल वोलेंटियर की भी टीम बनाई गई है जो उनके गांव से ऑक्सीजन का टैंकर सही सलामत गुजरते हुए इसका खयाल रखते हैं। पुलिस का एस्कॉर्ट भी अपने अपने जुरिडिक्शन में ऑक्सीजन की गाड़ी को एस्कॉर्ट करते हैं और जैसे ही उनका ज्यूरिडिक्शन खत्म होता है वह वहीं रुक जाते हैं साथ ही उसके बाद जिसका ज्यूरिडिक्शन शुरू होता है वह ऑक्सीजन की गाड़ी एस्कॉर्ट करने लगता है। p >
इस पूरे काम को सही तरीके से और ऑक्सीजन टैंकर सही सलामत अपने लक्ष्य तक पहुंचे इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए 100 के लगभग एस्कॉर्ट बनाया गया है। जो 24 घंटे ऑक्सीजन की गाड़ी के साथ होते हैं। सबसे ज्यादा पुलिस का पहरा पुणे ग्रामीण और रायगढ़ में लगाया गया है क्योंकि वहां पर ऑक्सीजन के प्लांट हैं और बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन से भरी ट्रक वहां से गुजरती हैं। p>
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