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कृषि कानूनों के खिलाफ दिनों और तारीखों का सैकड़ा मार दिया है किसान आंदोलन का रूप और रंग अब तेजी से बदल रहा है। आंदोलन के मिलान स्वरूप के साथ सरकार से बातचीत के रास्ते भी रुके तो जनता की सहानुभूति भी मिलनी बंद हो गई। अब हालात।
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