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ऑटिज्म (स्वलीनता), एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिससे पीड़ित लोगों में व्यवहार से लेकर कई तरह की दिक्कतें होती हैं।) ऑटिज्म के लक्षण लक्षण 1-3 वर्ष के बच्चों में नजर आते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया जाता है।
डॉ। के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ। तरुण पाल ने बताया कि इस बीमारी के लिए अनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कई कारण जिम्मेदार हैं। इस बीमारी से ग्रसित बच्चे अपने आप में खोए से रहते हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ। कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि यह बीमारी बच्चों के मानसिक विकास को रोक देती है।
सामान्य तौर पर ऐसे बच्चों को उदासीन माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ये लोग अद्भुत प्रतिभा वाले होते हैं। माना जाता है कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से यह समस्या होती है। कई बार गर्भावस्था के दौरान भोजन सही नहीं होने से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।
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