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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस आज : बचपन में ही नजर आने लगते हैं लक्षण, रहें सतर्क

by Sneha Shukla

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ख़बर सुनकर

ऑटिज्म (स्वलीनता), एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिससे पीड़ित लोगों में व्यवहार से लेकर कई तरह की दिक्कतें होती हैं।) ऑटिज्म के लक्षण लक्षण 1-3 वर्ष के बच्चों में नजर आते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया जाता है।

डॉ। के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ। तरुण पाल ने बताया कि इस बीमारी के लिए अनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कई कारण जिम्मेदार हैं। इस बीमारी से ग्रसित बच्चे अपने आप में खोए से रहते हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ। कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि यह बीमारी बच्चों के मानसिक विकास को रोक देती है।

सामान्य तौर पर ऐसे बच्चों को उदासीन माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ये लोग अद्भुत प्रतिभा वाले होते हैं। माना जाता है कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से यह समस्या होती है। कई बार गर्भावस्था के दौरान भोजन सही नहीं होने से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।

मनोचिकित्सक डॉ। रवि राणा ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली की वजह से परिवारों में एकजुटता का भाव बहुत कम हो गया है। बच्चों में असुरक्षा का एहसास बढ़ रहा है। एक बच्चे को अपने माता-पिता का समय और परिवार के बुजुर्गों का ध्यान और प्यार होना चाहिए। इससे वह सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करता है। बच्चों को खिलौने, किताबें और घर में कुछ आकर्षक खेल-खेलने की आदत डालनी चाहिए।

बच्चे के विकास की गति धीमी होती है
जिन बच्चों में ऑटिज्म की शिकायत होती है, उनके विकास की गति धीमी होती है। उनका नाम पुकारने पर भी वे कोई जवाब नहीं देते हैं। आमतौर पर छह महीने के बच्चे मुस्कुराना, उंगली पकड़ना और आवाज पर प्रतिक्रिया देना सीख लेते हैं, लेकिन जिन बच्चों में ऑटिज्म की शिकायत होती है वह ऐसा नहीं कर पाते हैं। इसके बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से मेडिकल चेकअप कराना चाहिए। बच्चे के पैदा होने से छह महीने तक उनकी आदतों पर गौर करें।

ऑटिज्म
– हर सौ में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार हो रहा है।
– लगभग 20 प्रति ऑटिज्म के मामलों के लिए आनुवांशिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
– लगभग 80 प्रतिशत मामलों के लिए पर्यावरण वंशानुगत कारण जिम्मेदार होते हैं।
– समय: 12 से 13 महीने के बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण नजर आने लगते हैं।

विस्तार

ऑटिज्म (स्वलीनता), एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिससे पीड़ित लोगों में व्यवहार से लेकर कई तरह की दिक्कतें होती हैं।) ऑटिज्म के लक्षण लक्षण 1-3 वर्ष के बच्चों में नजर आते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया जाता है।

डॉ। के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ। तरुण पाल ने बताया कि इस बीमारी के लिए अनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कई कारण जिम्मेदार हैं। इस बीमारी से ग्रसित बच्चे अपने आप में खोए से रहते हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ। कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि यह बीमारी बच्चों के मानसिक विकास को रोक देती है।

सामान्य तौर पर ऐसे बच्चों को उदासीन माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ये लोग अद्भुत प्रतिभा वाले होते हैं। माना जाता है कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से यह समस्या होती है। कई बार गर्भावस्था के दौरान भोजन सही नहीं होने से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।



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