Home India सीडब्ल्यूसी बैठक में कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, कोरोना के खिलाफ उपयों को बताया सतही; मनमोहन सिंह पीएम को लिखेंगे पत्र
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सीडब्ल्यूसी बैठक में कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, कोरोना के खिलाफ उपयों को बताया सतही; मनमोहन सिंह पीएम को लिखेंगे पत्र

by Sneha Shukla

कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने शनिवार को आरोप लगाया कि कोरोनाइरस महामारी से सामना में केंद्र सरकार का भारी कुप्रबंधन और अक्षमता देखने को मिली है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में यह फैसला भी किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पार्टी के सुझावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजेंगे।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे देश भर में जरूरतमंद लोगों की मदद करें। प्रदेश कांग्रेस कमेटियों से कहा गया है कि वे राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित करें ताकि लोगों की मदद की जा सके। सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, भारत में को विभाजित -19 का पहला मामला 30 जनवरी, 2020 को सामने आया था। भारत में को विभाजित का पहला टीका 16 जनवरी, 2021 को लगाया गया था। ये दो तारीखों के बीच और उसके पश्चात, त्रासदी, विकलांग और भारी कुप्रबंधन की एक विस्तृत गाथा है।

कांग्रेस कार्य समिति ने आरोप लगाया कि पहले दिन से ही केंद्र सरकार ने महामारी के नियंत्रण से संबंधित सभी शक्तियां और अधिकार अपने हाथों में ले लिए थे। उन्होंने कहा, महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केंद्र सरकार का हर आदेश और निर्देश कानून बन गया और राज्य सरकारों के पास प्रशासनिक उपायों को अपनाने और लागू करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं रही।

कोरोना के लिए पूर्व उपाय सतही थे
कांग्रेस की शीर्ष इकाई ने कहा, संक्रमण से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्राथमिक उपाय सतही थे। जब कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं था, तो ऐसे पेन्टिस में हस्तक्षेप ही एकमात्र विकल्प था। उसके लिए ‘टेस्टिंग, ड्रेसिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट की आवश्यकता थी। लेकिन इस दिशा में भी केंद्र सरकार का प्रयास जारी है। उन्होंने आरोप लगाया, केंद्र सरकार इस संबंध में पर्याप्त जन जागरूकता पैदा करने में असफल रही कि महामारी का घटता हुआ प्रकोप महामारी की दूसरी लहर का सूचक हो सकता है, जो कि पहली लहर की तुलना में अधिक विनाशकारी हो सकता है। बयान में दावा किया गया, पर्याप्त धन और अन्य रियायतें प्रदान करके भारत में दो स्वीकृत टीकों के उत्पादन और आपूर्ति में तेजी से वृद्धि कर रही है। भारत में अन्य उपक्रम बनाने वाली कंपनियों के स्वीकृत टीकों के अनिवार्य लाइसेंसिंग और उत्पादन का विकल्प अपनाने में विफलता हो रही है।

टीके की बर्बादी रोकने में विफल रही सरकार
सीडब्ल्यूसी ने कहा, पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और उद्देश्यों पंक्ति के कर्मियों के टीकाकरण के बाद सार्वभौमिककरण लागू करने में नाकाम होना। टीकाकरण कार्यक्रम में पूर्व पंजीकरण और नौकरशाही नियंत्रण से छुटकारा पाने में विफलता हो रही है। टीकाकरण का लागूयन राज्य सरकारों और सरकारी और निजी अस्पतालों को सौंपने में विफलता हो रही है। उन्होंने दावा किया, टीके की खुराक की बर्बादी को रोकने या कम करने में नाक मिल रही है, जिसके कारण आज 23 लाख से भी अधिक खुराक बर्बाद हो चुकी है। ईमानदार व्यक्तियों और उनके बच्चों की टेस्टिंग, पेंटिंग और ट्रेसिंग के परिमाण और गति को बनाए रखने में धड़ देखने को मिला। उसने यह आरोप भी लगाया, आत्मनिर्भरता के अव्यावहारिक जोश के कारण अन्य ऐसे टीकों के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने में गलती हो रही है, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ और जापान में मंजूरी मिल गई थी। सीडब्ल्यूसी ने दावा किया कि राज्यों को पर्याप्त मात्रा में टीके उपलब्ध नहीं कराये गए।

राष्ट्र को एक अभूतपूर्व विनाश का सामना करना पड़ेगा
उन्होंने कहा, ” अपारदर्शी पीएम-कैर फंड में सैकड़ों करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद राज्य सरकारों को पर्याप्त धन मुहैया कराने में केंद्र विफल रहा जबकि राज्य दो मोर्चों पर युद्ध लड़ रहे थे – एक महामारी के खिलाफ और दूसरा आर्थिक संदेह के खिलाफ। सीडब्ल्यूसी ने कहा, लोगों को समझना होगा कि जब तक तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए जाएंगे, राष्ट्र को एक अभूतपूर्व विनाश का सामना करना पड़ेगा। आशा करते हैं कि सरकार विवेक और अक्षमता से काम लेगी।

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