Home panchaang-puraan Masik Shivratri 2021: मई महीने की मासिक शिवरात्रि कब है? इन दो शुभ योग में करें भगवान शिव की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त
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Masik Shivratri 2021: मई महीने की मासिक शिवरात्रि कब है? इन दो शुभ योग में करें भगवान शिव की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त

by Sneha Shukla

हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। मई महीने में मासिक शिवरात्रि 09 मई, दिन रविवार को है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा के दौरान बेलपत्र, जल और दूध अर्पित करना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान शिव भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।

मई महीने में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि के दिन शुभ योग बन रहे हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन प्रीति व आयुष्मान योग में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में आयुष्मान व प्रीति योग को शुभ योगों में गिना जाता है। कहा जाता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है।

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ये शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव की पूजा-

ब्रह्म मुहूर्त- 03:59 ए एम, 10 मई से 04:42 ए एम, 10 मई तक।
अभिजित मुहूर्त- 11:39 ए एम से 12:32 पी एम तक।
विजय मुहूर्त- 02:19 पी एम से 03:12 पी एम तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:32 पी एम से 06:56 पी एम तक।
अमृत ​​काल- 02:49 पी एम से 04:36 पी एम तक।
निशिता मुहूर्त- 11:44 पी.एम. से 12:26 ए एम, 10 मई तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:29 पी एम से 05:25 ए एम।, 10 मई तक।

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मासिक शिवरात्रि पूजन विधि-

1. श्रद्धालुओं को शिवरात्रि की रात को जाग कर शिव जी की पूजा करनी चाहिए।
2. मासिक शिवरात्रि वाले दिन आप सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि के बाद किसी मंदिर में जा कर भगवान शिव और उनके परिवार (पार्वती, गणेश, कार्तिक, नंदी) की पूजा करें।
3. पूजा के दौरान शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, शुद्ध घी, दूध, शक़्कर, शहद, दही आदि से करें।
4. शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएँ। अब आप भगवान शिव की धुप, दीप, फल और फूल आदि से पूजा करें।
5. शिव पूजा करते समय आप शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करें।
6. इसके बाद शाम के समय फल खा सकते हैं लेकिन व्रती को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगले दिन भगवान शिव की पूजा करें और दान आदि करने के बाद अपना व्रत खोलें।

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