Home Bollywood Ok Computer Review: अजीब रोबोट की कहानी में दम नहीं, राधिका आप्टे की वेबसीरीज करती है निराश
Ok Computer Review: अजीब रोबोट की कहानी में दम नहीं, राधिका आप्टे की वेबसीरीज करती है निराश

Ok Computer Review: अजीब रोबोट की कहानी में दम नहीं, राधिका आप्टे की वेबसीरीज करती है निराश

by Sneha Shukla

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अगर ओके कंप्यूटर देख कर आप भविष्य के बारे में अनुमान लगाएंगे तो निश्चित जानिए कि डिप्रेशन में चले जाएंगे। वहाँ इंसानों में दिमाग नहीं मिलेगा और क्रिएटिविटी ऐसा खाली डिब्बा होगा, जिसके छेद देख कर छलनी शरमा जाएगी। लेकिन यह फ्यूचर की बात है। वर्तमान में तो ओके कंप्यूटर लिखने बनाने वाले भूल गए कि वे 2031 की कहानी को 2021 के दर्शकों के लिए बना रहे हैं। भाग्य से यह समय विचारों की सुनामी का है और इसमें सिनेमा की रचनात्मकता शानदार दौर में है। ऐसे में ऑप्टिकल हेलस्टार पर आई छह कड़ियों की यह वेबसीरीज डार्क कॉमेडी के नाम पर मजाक है। डार्क की बात तो दूर, कॉमेडी तक नहीं मिलती। यह देख कर लगता है कि 1970 के दशक की फ्यूचरिस्टिक कहानी वाली कोई एमपी फिल्म चल रही है। इससे बेहतर सिनेमा आज के दौरान स्टूडेंट बनाते हैं।

लगभग पौन-पौन घंटे की छह कड़ियों वाली ओके कंप्यूटर देखता है आपको खुद से झूठी बुद्धिजीवी होने का ढोंग करते रहना होगा वर्ना आत्मा की आवाज़ सुन कर तो यह बीच में ही बंद कर देगा। वेबसीरीज में न ढंग की कहानी है, न संवाद और न कलाकारों का अभिनय। हालांकि कलाकार कम दोषी हैं। वास्तविक जिम्मेदारी शब्द-निर्देशकों की है। 2013 में एक विशेष दर्शक वर्ग द्वारा स सराही गई फिल्म ‘शिप ऑफ वासियस’ से आनंद गांधी ने नाम कमाया था। फिर तुंबाड (2018) जैसी सफल फिल्म से जुड़ी लेकिन उसी साल ‘क्षुद्रकार एला’ जैसी बोर फिल्म ने भी दी। ओके कंप्यूटर में वह क्रूड प्रोड्यूसर है। इसकी कहानी उन्होंने निर्देशक जोड़ी पूजा शेट्टी-नील पागेदर के साथ मिलकर लिखी है। आनंद गांधी के रिकॉर्ड से साफ है कि उनके पास आम दर्शकों के लायक कुछ नहीं है। अध्यात्म-केंद्रित अति-बौद्धिकता उनकी रचना प्रक्रिया के केंद्र में है।

ठीक है कंप्यूटर की समीक्षा करें: अजीब रोबोट की कहानी में दम नहीं, राधिका आप्टे की वेबसीरीज करती है

जब 2021 में सड़क-पानी-बिजली-अस्पताल-शिक्षा से जुड़ी मूलभूत समस्याएं हल नहीं हो रही हैं तो क्या 2031 में देश का इतना विकास हो जाएगा कि सब कंप्यूटर संभाल लेंगे। स्वचालित कारों दौड़ेंगी, रोबोटों का समानांतर संसार होगा, मानवाधिकार जैसे रोबोटशिप कार्यकर्ता होंगे, अग्रणी-सेलेब्रिटिस की रोबोट जगह ले जाएंगे और बहुत लोकप्रिय होंगे कि उनकी लगभग पूजा होगी। ओके कंप्यूटर एक खराब फांती है। जिनकी नमीनी जड़ें हैं और न आकाशी कल्पना शक्ति। उन्होंने सरल शब्दों और सहज दृश्यों में यह नहीं समझा पाती कि निजीकरण ने इंसान को इंसान से दूर कर उसकी संवेदना का कचूमर निकाल दिया है। हमें अब प्रकृति के करीब जाना अपनी आत्मा में झांकने का समय आ गया है। इसलिए भविष्य उज्ज्वल हो और आने वाली पीढ़ी ऊंचाई-नीच, भेद-भाव, जाति-धर्म से मुक्त एक रचनात्मक कुतुम्ब की तरह मिल-जुल कर सके।

ठीक है कंप्यूटर की समीक्षा करें: अजीब रोबोट की कहानी में दम नहीं, राधिका आप्टे की वेबसीरीज करती है

ओके कंप्यूटर की कहानी 2031 में एक स्वचालित / रोबोटिक कार द्वारा एक्सीटेंड में एक व्यक्ति को मारने देने के हादसे से शुरू होती है। मरने वाले का चेहरा बुरी तरह टूट गया है और पेड़ से टकराई कार घायल है। पुलिस अधिकारी साजन कुंडू (विजय वर्मा) मौका-ए-वारदात पर पहुंचता है। वहाँ रोबोटिक कर्मचारी लक्ष्मी (राधिका आप्टे) भी आती है। साजन हादसे का दोषी कार को इंगित करता है लेकिन लक्ष्मी कहती है कि किसी ने कार को चैट कर लिया था, इसलिए कार बेकसूर है। सवाल उठता है कि आखिर कौन है कार किराए पर लेकर एक इंसान की हत्या कराने वाला और फिर मरने वाला भी कौन है। क्यों हुई हत्या कहानी इन सवालों से शुरू होकर अजीब (इन के स्लॉट्स, पाइपों और तारों से बना रोबोट) तक पहुंचती है। 2026 में भारत के महान वैज्ञानिकों ने यह महत्वाकांक्षी रोबोट बनाया था। उन्हें भरोसा था कि अजीब देशवासियों की सारी समस्याएं खत्म कर देंगे। लेकिन अजीब स्टैंडअप कॉमेडियन बन गया। अजीब को आदमी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है और दोषी भी पाया जाता है। लेकिन क्या यह सच है? कहानी और आगे बढ़ रही है। मानव अस्तित्व, संसार और ब्रह्मांडों के सवाल-जवाब तक है। जिन सवालों का जवाब पिछले हजारों वर्षों में मनुष्य नहीं पा गए, वे यहाँ भी हैं।

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भविष्य बताने के नाम पर जैसे कुछ लोग ठगी का धंधा करते हैं, उसी तरह ओके कंप्यूटर है। जिसमें बेसिर-पैर की बातें हैं। इसके संवादों पर भी ठीक से काम नहीं किया गया। किरदारों को हास्यास्पद तरीके से बुना गया है। भरोसेमंद नाम या ब्रांड बाजार में उपभोक्ताओं को कैसे धोखा देते हैं, ओके कंप्यूटर उसका उदाहरण है। आप सोच में पड़ जाते हैं कि विजय वर्मा, राधिका आप्टे, जैकी श्रॉफ और रसिका दुग्गल जैसे ऐक्टरों के पास क्या काम की कमी है या उन्होंने आनंद गांधी और मेटल-हॉटस्टार के नाम पर वेबसीरीज ली। इन बातों के बाद भी अगर आप अपने इंटेलिजेंस को पलना चाहते हैं तो ओके कंप्यूटर आपके लिए है।



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