<पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> नई दिल्ली: strong> उत्तर प्रदेश में साप्ताहिक बंद यानी संडे लॉकडाउन घोषित है। मंडियों को हालांकि पूरे लॉकडाउन से अलग जरूर रखा गया है, फिर भी कोरोनावायरस से संबंधित बर्नेस जरूरी है। लेकिन साहिबाबाद मंडी में जैसे लोगों ने न बरतने की कसम खाई है। ज्यादातर फलों के सब्जी विक्रेता चेहरे के बिना काम करते दिखते हैं। p>
कैमरा के खुलने से लेकर कैमरे की नजर घूमने तक लोग एक्षण मोड में आते दिखे। किसी को समारोह पहनना याद आ गया तो किसी ने कैमरा में कैद हो जाने के बावजूद यह कहा कि मैंने तो संकाय पहन रखा है। कोई मुख को को भूल गया तो कोई धुंध और सीना जोरी दिखाता है। यहां भीड़ अमूमन जितनी होती है उससे कम दिखी लेकिन लोगों के रवैए में ढीलेपन से ज्यादा नजर आई। p>
पुलिस प्रशासन की ढिलाई strong> p>
उत्तर प्रदेश की पुलिस प्रशासन का कोई व्यक्ति यहां ड्यूटी नहीं कर सकता। न ही संकाय या सोशल डिस्टेंस को लेकर अनाउंसमेंट होता है। यूपी में वर्क ना पहनने पर पहली बार में एक हजार रुपये का संयोजन है। वहीं दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये तक का कोड है। लेकिन पुलिस प्रशासन की ढिलाई उत्तर प्रदेश में बढ़ते कोरोनावायरस के आंकड़ों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। p>
="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> यूपी में कोरोनाटे रोगियों की संख्या शनिवार को 27357 दर्ज की गई। वहीं बात गाजियाबाद जिले की करें तो यहां शनिवार रात्रि 8 बजे से सोमवार सुबह 7 बजे तक सम्पूर्ण लॉकडाउन तब तक लागू रहेगा, जब तक कि स्थिति नियंत्रण में नहीं आती और कोरोनावायरस के आंकड़ों में कमी नहीं देखी जाती। & nbsp; p> <पी शैली ="पाठ-संरेखित करें: औचित्य;"> ये भी पढ़ें: strong> p>
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