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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को जींद के किसान महापंचायत के दौरान केंद्र पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने जीएनसीटीडी कानून का जिक्र करते हुए कहा कि वे संसद में बिल लेकर आए ताकि केजरीवाल को दंडित कर पाया जाए। किसानों के प्रदर्शन करने का समर्थन करने पर हमें उसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
उन्होंने कहा कि वे बिल पास कर रहे हैं और अधिकार को साझा करने वाली सरकार की बजाय उप-राज्यपाल के हाथों में दे रहे हैं। हम आज के संघर्ष के लिए क्या करेंगे? दिल्ली सीएम ने कहा केन्द्र ने मेरे पास फाइल भेजी और प्रस्ताव बनाना शुरू कर दिया कि कानून व्यवस्था का सवाल है। उन्होंने मुझे यहां बताया कि वे मेरा अधिकार ले लेंगे। मैंने उनकी बातों को नहीं सुना और फाइल को रिजेक्ट कर दिया था।
उन्होंने केजरीवाल को दंडित करने के लिए संसद में एक विधेयक पेश किया है। किसान विरोध का समर्थन करने के लिए हमें विरोध का सामना करना पड़ा। वे निर्वाचित सरकार के बजाय एलजी के हाथों में बिल पास करके और सत्ता सौंपकर हमें दंडित कर रहे हैं। क्या हमने इसके लिए आजादी की लड़ाई लड़ी ?: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल pic.twitter.com/aSV6laApTl
– एएनआई (@ANI) 4 अप्रैल, 2021
इसके साथ ही, अरविंद केजरीवाल ने कहा- हम उन 300 किसानों को सलाम करते हैं जिनके किसान आंदोलन के दौरान मौत हो गई। यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनकी कुर्बानी व्यर्थ ना हो।
दिल्ली सीएम ने कहा– पता चला, कल रोहतक में इन लोगों ने किसानों पर लाठीचार्ज किया। किसानों का साथ देना चाहिए सरकारों को या लाठीचार्ज करना चाहिए? हम निंदा करते हैं इस बात की। मुझे पता चला कि लोग जा रहे हैं, इसलिए आप बात कर सकते हैं। बहुत किसान अभी भी बेर में भी फसे है। पंजाब के किसानों का धन्यवाद, आज हरियाणा में आया।
उन्होंने कहा- “पूरे देश के किसान आपके साथ हैं। पहले दिन से मजबूती के साथ अरविंद केरीवाल, दिल्ली सरकार किसानों का साथ दे रही है। जब किसानों ने दिल्ली बॉर्डर पर कूच किया तो हरयाणा सरकार ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठी चार्ज किया, लेकिन हमारे किसान सब पार कर के पुहंचे थे। “
गौरतलब है कि पिछले लगभग चार महीने से दिल्ली की सीमाओं के आसपास किसान नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक केंद्र सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल पाया। किसानों की मांग है कि सरकार सीपीपी को कानून का हिस्सा बनाने के साथ तीन नए कृषि कानूनों को वापस ले।
जबकि, पिछले साल संसद से पास कराए गए तीन नए कृषि सुधार संबंधी कानूनों को लेकर केंद्र सरकार की दलील है कि इससे कृषि क्षेत्र में नए निवेश के अवसर खुलेंगे और किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक होगी।
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