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समापन 22 अप्रैल को दशमी में होगा। चैत्र नवरात्र में कलश स्थापना प्रात: काल 5:28 से लेकर दिन में 8:46 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त का समय 11:36 से 12:24 तक रहेगा। 12 अप्रैल की सुबह 8:01 बजे प्रतिपदा लगेगी जो कि दूसरे दिन 13 अप्रैल को सुबह 10:17 बजे तक रहेगी। उदया तिथि में एकम तिथि होने से नवरात्रि की शुरुआत 13 अप्रैल को होगी।
नवसंवत्सर के राजा और मंत्री दोनों मंगल रहेंगे। मंगलवार के दिन चैत्र नवरात्र का आरंभ होने से मां दुर्गा देवी का आगमन घोड़े पर हो रहा है जो राष्ट्र के लिए शुभ कारक नहीं है।) देश में भय और युद्ध की स्थिति बनी रहेगी। कंधे पर देवी के प्रस्थान होने से यह राष्ट्र के लिए सुख समृद्धि कारक होगा।
ज्योतिषाचार्य पं। राहुल तिवारी ने बताया कि मान्यता है कि नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं। यहां वे नौ दिनों तक वास करते हुए भक्तों की साधना से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। नवरात्रि पर देवी दुर्गा की साधना और पूजा-पाठ करने से आम दिनों के मुकाबले पूजा का कई गुना फल की प्राप्ति होती है। भगवान राम ने भी लंका पर चढ़ाई करने से पहले युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए देवी साधना की थी।
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