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जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिरका में गंगा रहता है। पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-सुथरी बातें करते हैं।
पीठ ने 53 वर्षीय रोगी की आईसीयू बिस्तर पाने की याचिका पर परीक्षण करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा पद्धति पूरी तरह से नाकाम हो गई है।]यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का विभाजन नहीं है। इस पर मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने यह नहीं कहा कि कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बिस्तर कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
लोगों की जान बचाना सरकारी दायित्व है
मेहरा की 15000 बिस्तर और 1200 आईसीयू बिस्तर सामान में होने की दलील पर कोर्ट भड़क गई। पीठ ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? ड्रिलिंग पाइपलाइन है, अभी भी वह बेड व प्रदूषण में नहीं आए हैं।
कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराने वाली सरकार का दायित्व है, उसकी इनकार नहीं किया जा सकता है। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना रोगियों को अस्पताल की जरूरत है।
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