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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “ मिट्टी बचाओ आन्दोलन ” में संबोधित किया | Save Soil

by Anjali Anjali

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी बचाओ आन्दोलनप्रोग्राम में लोगो को संबोधित किया | Save Soil

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत समेत पूरे विश्व में अपनी पर्सनालिटी और बेस्ट लीडरशिप के लिए जाने जाते हैं,  और जब एक ऐसा यशस्वी नेता किसी भी विशेष प्रोग्राम में कोई संबोधन करता है तो लोग उसे बड़े ध्यान से सुनते हैं।

इसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईशा फाउंडेशन के द्वारा आयोजित की गई “मिट्टी बचाओ कार्यक्रम OR Save Soil Program ” यानि कि “सेव सोईल प्रोग्राम” के दौरान विश्व पर्यावरण दिवस पर पूरे प्रोग्राम में लोगों को संबोधित किया, और जलवायु परिवर्तन के कारण  मृदा क्षरण को रोकने तथा इससे सचेत होने के बारे में  नरेंद्र मोदी ने लोगों से बातचीत की।

इसके बारे में हमने आपको नीचे विस्तार से बताया है, किस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी मुख्य मुद्दों के बारे में चर्चा की है।

तो चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं कि ईशा फाउंडेशन के द्वारा आयोजित की गई “मिट्टी बचाओ  कार्यक्रम OR Save Soil” में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा-


मिटटी बचाओ कार्यक्रममें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन |Save Soil

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस यानी कि 5 जुलाई 2022 को ईशा फाउंडेशन के द्वारा आयोजित किए गए “मिटटी बचाओ कार्यक्रम” के दौरान प्रोग्राम में उपस्थित सभी लोगों को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और जग्गी वासुदेव जिन्हें आमतौर पर “सद्गुरु” के नाम से भी जाना जाता है, उनके द्वारा  शुरू किए गए “मिटटी बचाओ आंदोलन OR Save Soil Program ” की सराहना भी की।

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि  एक ऐसा समय  जहां  पूरा देश आजादी के अमृत महोत्सव की तैयारी कर रहा है, और इसमें देश को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की नई प्रतिज्ञायें ले रहा है, ऐसे समय में “मिट्टी बचाओ आंदोलन” जैसे आंदोलनों का एक अलग ही महत्व होता है। पर्यावरण संरक्षण में मृदा संरक्षण भी एक मुख्य केंद्र है, जिसे नकारा नहीं जा सकता है।

मोदी जी ने अपने प्रधानमंत्री के तौर पर किए गए उन कार्यों के बारे में भी लोगों को बताया जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तरदाई है, जैसे कि स्वच्छ भारत मिशन, वेस्ट टू वेल्थ मिशन, सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी, एक सूर्य एक पृथ्वी  प्रोग्राम, पेट्रोल में एथेनॉल का सम्मिश्रण पर्यावरण के प्रति उत्तरदाई है।


पर्यावरण संरक्षण में भारत का योगदान | Save Soil Program

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का पर्यावरण संरक्षण में योगदान बहुआयामी है, और भारत पर्यावरण संरक्षण के लिए तब से काम कर रहा है जब से पूरी दुनिया केवल पर्यावरण संरक्षण के बारे में बातें कर रही थी।

आज के दुनिया के कई बड़े देश जो आकार और अर्थव्यवस्था में भारत से कई गुना बड़े हैं वह अत्यधिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, और कार्बन का उत्सर्जन कर रहे हैं।

जहां भारत में हर वर्ष प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन क्षमता 0।5 टन की है वही एक विकसित देश में आमतौर पर 4 टन प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन फुटप्रिंट देकर जाते हैं।

मोदी जी ने कहा किपर्यावरण संरक्षण पर एक लंबे समय से भारत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ भी कार्य कर रहा है। “आपदा में अवसर” जैसे विचार के संदर्भ में और “अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन” जैसे स्थापित संगठनों की मदद से भारत 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को लगभग 0 बराबर कर देगा। इसके बारे में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लोगों को जानकारी दी।


प्रधानमंत्री जी के मृदा संरक्षण के लिए 5 मूल मंत्र

मृदा संरक्षण OR Save Soil के लिए और मृदा कोअपघटन से बचाने के लिए पांच मुख्य बातों पर ध्यान दिलवाया है-

  1. जिसमें पहले उन्होंने बताया कि मिट्टी को हमें केमिकल मुक्त करना होगा।
  2. दूसरा उन्होंने बताया कि मिट्टी को किस प्रकार संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि मिट्टी में रहने वाले जीवो को भी बचाया जा सके।
  3. तीसरा उन्होंने बताया कि मिट्टी में नमी कैसे बनी रहे और पानी की उपलब्धता कैसे बढ़ाई जा सके इसके बारे में हमें शोध करना चाहिए।
  4. चौथा भूजल कम होने से मिट्टी को हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को सचेत करना चाहिए, तथा इस को कैसे दूर किया जा सके इस पर चर्चा की जानी चाहिए।
  5. पांचवा, जंगलों के घटने से मिट्टी के हो रहे कटाव को कैसे रोका जा सके इसके बारे में उपाय किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बताया, कि बीजेपी की सरकार आज के समय  मृदा अपघटन को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करती आ रही है, और इसके लिए कृषि क्षेत्र में भी मुख्य प्रयास किए जा रहे हैं, और इसके लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की जानकारी जैसी मिट्टी के प्रकार मिट्टी में पानी की कमी पानी कितना होना चाहिए, और कितने डालने चाहिए।

इन सब के बारे में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने का अभियान भी भारत सरकार के द्वारा चलाई जा रहा है। वर्षा के पानी को भी एकत्रित किए जाने के उपाय पर जोर दिया जा रहा है ताकि मिट्टी में हो रही पानी की कमी  को दूर किया जा सके, तथा मिट्टी के पानी को सोखने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।


भारत सरकार की जैव विविधता तथा वन्य जीवों से संबंधित नीतियाँ

प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार भारत आज के समय जैव विविधता तथा वन्य जीव से संबंधित नीतियों का पालन कर रहा है इससे वन्यजीवों की संख्या में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।

साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी एक नया बल मिला है। आज के समय बाघ, तेंदुआ, शेर, हाथी की जनसंख्या देश में बढ़ती जा रही है, जो कि वास्तव में एक अच्छी खबर है।

इसी के साथ प्रधानमंत्री ने में आत्मनिर्भरता की बात भी अपने संबोधन में कही और किसानों की आय बढ़ाने तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने  को लेकर  प्रधानमंत्री जी ने गोवर्धन योजना का उदाहरण दिया है,  और लोगों को इन सभी योजनाओं के बारे में अधिक से अधिक जानकारी पहुंचाने का आवाहन  भी किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में और भी विभिन्न प्रकार की बातें की है जिन्हें आप ऑफिशियल यूट्यूब वीडियो जो कि ईशा फाउंडेशन के यूट्यूब चैनल पर आपको मिल सकती है, वहां पर आप देख सकते हैं इसी के साथ मंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी बचाओ आंदोलन के लिए धन्यवाद भी कहा।


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निष्कर्ष :

आज के लेख में हमने जाना कि ईशा फाउंडेशन के द्वारा आयोजित किए गए “मिट्टी बचाओ कार्यक्रम ( Save Soil ) ” में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में किस प्रकार पर्यावरण संरक्षण तथा मृदा संरक्षण संबंधी कई मुद्दों को उठाया, तथा ईशा फाउंडेशन के मुख्य चेहरे जग्गी वासुदेव यानी कि सद्गुरु जी को भी सादर प्रणाम किया, तथा उन्हें धन्यवाद किया।

हम आशा करते हैं कि आप प्रधानमंत्री जी के संबोधन में उठाए गए मुद्दों ( Save Soil ) को सही से समझ पाए होंगे। यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।


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