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Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki

Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki | आर्य समाज की स्थापना किसने की ?

by Pritam Yadav

Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki :- आपने यह कई बार सुना या पढ़ा होगा कि आर्य समाज ने हिंदू सुधार आंदोलन करके हिंदू धर्म के आदर्शों और संस्कारों को बचाया है। परंतु क्या आप जानते हैं, कि Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki और इसके क्या सिद्धांत थे। यदि नहीं तो आज का यह लेख आपके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

आज के इस लेख में हम जानेंगे, कि Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki और इन्होंने किन-किन क्षेत्रों में अपना योगदान दिया। साथ ही हम उनके सिद्धांतों के बारे में भी पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे।


आर्य समाज की स्थापना किसने की ? ( Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki )

आर्य समाज की स्थापना दयानंद सरस्वती द्वारा 10 अप्रैल 1875 को मुंबई में मणिचंद की वाटिका में की गई थी। आर्य समाज एक आंदोलन था, जिसे हिंदू धर्म में सुधार व बहुत सी समाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए शुरू किया गया था।

आर्य समाज का मुख्यालय पहले मुंबई में था, बाद में इसे 1877 को लाहौर में स्थान्तरित कर दिया गया।


आर्य समाज के सिद्धांत ( Arya Samaj ke Siddhant )

  • ईश्वर एक है और वह निराकार है। वही सब जगह विराजमान है व पूजने योग्य हैं।
  • ईश्वर हर प्रकार के ज्ञान का प्राथमिक स्रोत है।
  • असत्य को त्याग कर सत्य को स्वीकार करना चाहिए।
  • ईश्वर वायु और आकाश की तरह सर्वव्यापी है और ईश्वर कभी अवतार नहीं लेता।
  • ईश्वर का ध्यान किसी भी एकांत स्थान पर बैठकर किया जा सकता है । इनके अनुसार दैनिक यज्ञ करना हर आर्य का कर्तव्य है।
  • परमाणुओं को ना कोई बना सकता है, ना उसके टुकड़े हो सकते हैं, अर्थात वह अनादि काल से हैं उसी प्रकार परमात्मा और हम जीवात्मा अनादि काल से हैं।
  • वेद ही सभी सत्य विधाओं की पुस्तक हैं। वेद को पढ़ना और पढ़ाना ही हर आर्यों का प्रथम धर्म है।
  • सत्य को ग्रहण करने और असत्य को त्यागने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
  • अपने धर्म का पालन करते हुए, अर्थात सत्य और असत्य पर विचार करके ही, हर कार्य करना चाहिए।
  • सबके साथ प्रेम पूर्वक व धर्मानुसार बर्ताव करना चाहिए।
  • शारीरिक आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना ही हर आर्य का परम उद्देश्य होना चाहिए।
  • अविद्या का नाश और विद्या की पूर्ति करनी चाहिए।
  • प्रत्येक व्यक्ति को अपनी उन्नति से ही संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए, बल्कि अन्य व्यक्तियों की उन्नति में भी योगदान करना चाहिए।
  • हमें किसी को भी अपने नियम मानने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए विश्व के प्रत्येक प्राणी को अपने बनाए नियमों को मानने का पूरा अधिकार है।

आर्य समाज या दयानंद सरस्वती द्वारा सामाजिक धार्मिक और अन्य सुधार

आर्य समाज के द्वारा धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक, तौर पर कई सुधार किए गए, जो निम्नलिखित है।

1. सामाजिक क्षेत्र में योगदान

  • समानताआर्य समाज के अनुसार समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान समझा जाना चाहिए और जात-पात के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए।
  • वर्ण व्याख्याइनके अनुसार जन्म के आधार पर वर्ण व्याख्या नहीं होनी चाहिए,बल्कि कर्म के आधार पर होनी चाहिए। कर्म के आधार पर ही व्यक्ति को ऊंचा या नीचा समझा जाना चाहिए।
  • महिला सुधार व्यवस्थाउन्होंने विधवा को दोबारा विवाह करने और शिक्षा ग्रहण,करने पर योगदान दिया। इसके अलावा महिलाओं से संबंधित जो भी बुराइयां थी जैसे पर्दा प्रथा, बाल विवाह, बहु विवाह, दहेज प्रथा, आदि प्रथाओं को समाप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2. धार्मिक क्षेत्र में योगदान

  • हिंदू धर्म कट्टरताहिंदू धर्म को कट्टरता प्रदान करने का काम भी स्वामीनंद ने किया उन्होंने कहा कि हिंदू है, तो हिंदी है, और हिंदी है, तो हिंदुस्तान है।
  • हिंदू धर्म का आधारउन्होंने कहा कि हिंदू धर्म का आधार वेद है इसके लिए उन्होंने नारा दिया “वेदों की ओर लौटो”
  • वेद और तर्क उन्होंने कहा कि, वेदों को भी पहले तर्क की कसौटी पर परख लेना चाहिए, तब ही इस पर विश्वास करना चाहिए।
  • आडंबर का विरोधवे विभिन्न प्रकार के कर्मकांड व मूर्ति पूजा, का विरोध करते हैं उनका मानना है कि ईश्वर एक है, सर्वशक्तिमान है, पारब्रह्म है, निराकार है। और वे पुनर्जन्म मैं भी विश्वास रखते है, वे कहते थे कि हिंदू धर्म बहुत ही ऊंचा धर्म है।

 3. राजनीतिक क्षेत्र में योगदान

राजनीतिक क्षेत्र में इनका ‘स्व’का नारा था। स्वभाषा, स्वधर्म, स्वदेशी,और स्वराज्य,उन्होंने कहा यह ही भारतीय राष्ट्रवाद का मुख्य आधार है, उन्होंने कहा कि विदेशी-राज चाहे कितना भी अच्छा क्यों ना हो, वह सुखदाई नहीं हो सकता। और स्वदेशी चाहे कितना भी बुरा क्यों ना हो वह अपने कल्याण के लिए ही सोचेगा।

उन्होंने भारतीयों के मन में राष्ट्र भावना उत्पन्न करने का कार्य किया। वे कहते थे कि भारत की राष्ट्रीय भाषा हिंदी ही होनी चाहिए। 

4. शैक्षिक क्षेत्र में

वे कहते हैं कि, शिक्षा प्राप्त किए बिना और वेदों की शिक्षा प्राप्त हुए बिना , भारतीय को वापस वेदिक परंपरा में ले जाना मुश्किल है।


स्वामी दयानंद सरस्वती का परिचय

दयानंद सरस्वती का बचपन का नाम मूल शंकर, था। सत्य और ज्ञान के प्रकाश के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने कम उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था, तथा पूरे भारत का भ्रमण किया। दयानंद सरस्वती के प्रथम गुरुदंडी स्वामी पूर्णानंद थे।

स्वामी पूर्णानंद ने ही दयानंद सरस्वती को सन्यास की दिशा दी, और मूल शंकर का नाम दयानंद सरस्वती रखा। दयानंद सरस्वती ने 1876 में संस्कृति भाषा में, सत्यार्थ प्रकाश की रचना की जिसे आर्य समाज का बाइबल कहा जाता है।

दयानंद सरस्वती ने ‘वेदों की ओर लौटो, औरभारत भारतीयों के लिए है, जैसे नारे लगाए दयानंद सरस्वती ने हिंदू धर्म के अंतर्गत शुद्धि आंदोलन चलाया, दयानंद ने पुराणों जैसे हिंदू धर्म के ग्रंथों की प्रमाणिकता को अस्वीकार किया।

आर्य समाज मूर्ति पूजा को अस्वीकार करता है। दयानंद सरस्वती ने पाश्चात्य शिक्षा का विरोध किया, दयानंद सरस्वती प्रथम भारतीय थे जिन्होंने वेदों का हिंदी में अनुवाद किया।

उन्होंने ने सबसे पहले विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर बल दिया, दासता को दयानंद सरस्वती ने भारत का मूल रोग बताया है।

अंत जोधपुर में कुछ विरोधियों ने दयानंद सरस्वती को कांच पीसकर पिला दिया जिससे 30 अक्टूबर 1833 को दिवाली वाले दिन उनकी मृत्यु हो गई।


FAQ’S :

प्रश्न 1 – आर्य समाज की स्थापना किसने और कब की ?

उत्तर - आर्य समाज की स्थापना दयानंद सरस्वती द्वारा 10 अप्रैल 1875 को मुंबई में मणिचंद की 
वाटिका में की गई थी।

प्रश्न 2 – आर्य समाज के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?

उत्तर - 'दयानंद सरस्वती, आर्य समाज के प्रथम अध्यक्ष थे।

प्रश्न 3 – आर्य समाज की स्थापना कहां हुई थी ?

उत्तर - आर्य समाज की स्थापना दयानंद सरस्वती द्वारा मुंबई में की गई थी

प्रश्न 4 – आर्य समाज का नारा क्या है ?

उत्तर - आर्य समाज का नारा है कृण्वन्तो विश्वमार्यम्, जिसका अर्थ है विश्व को आर्य बनाते चलो।

प्रश्न 5 – ” वेदों की ओर लौटो ” और ” भारत भारतीयों के लिए है ” नारे किसने दिए थे?

उत्तर - 'दयानंद सरस्वती, द्वारा दिए गए थे।

निष्कर्ष :

इस लेख में हमने आपको बताया की Arya Samaj Ki Sthapna Kisne Ki, उम्मीद है इस लेख के माध्यम से आपको आर्य समाज के बारे में सभी जनकरियाँ मिल पायी होंगी। यदि आपको इस लेख से संबन्धित कोई प्रश्न पूछना हो तो हमे कमेंट में पुछे।


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